गाजियाबाद के कविनगर में संचालित अवैध फैक्टरी में बन रहा नकली लुब्रिकेंट उत्तर भारत में सप्लाई किया जा रहा था। पुलिस ने अभी तक यूपी, दिल्ली और हरियाणा में ऐसी 42 जगह चिन्हित की हैं जहां नकली इंजन ऑयल, 2-टी ऑयल, ब्रेक ऑयल और गियर ऑयल खपाया जा रहा था। फैक्टरी संचालक के बेटे समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस अब नकली ऑयल बेचने वालों की तलाश में जुटी है।
एएसपी सदर आकाश पटेल ने बताया कि थाना बीबीनगर, बुलंदशहर के गांव अल्लीपुर चितसोना निवासी लच्छी गिरी नामी कंपनियों के नकली इंजन ऑयल का धंधा चला रहा था। उसने कविनगर के लालकुआं में फैक्टरी चला रखी थी, जबकि पिलखुवा में उसने गोदाम बनाया हुआ था, जहां पुराने तेल को फिल्टर कर पैक किया जाता था। मसूरी में लच्छी गिरी ने दफ्तर के साथ गोदाम भी खोला हुआ था। लच्छी गिरी के बेटे सौरभ गिरी निवासी आरकेपुरम गोविंदपुरम और उसके साथी जयचंद निवासी गांव कुराली थाना जानी मेरठ को गिरफ्तार कर लिया गया है। लच्छी गिरी की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
दो तरीके से बनाया जा रहा था नकली ऑयल
बड़े वाहनों (ट्रक, बस और कार) के लिए: ट्रांसफॉर्मर के पुराने तेल को रिसाइकिल कर उसका कालापन दूर किया जाता था। इसके बाद उसमें हरा व लाल रंग मिलाकर ब्रेक ऑयल, 2-टी ऑयल, गियर ऑयल और डिस्क ब्रेक का ऑयल तैयार किया जा रहा था।
दोपहिया वाहनों (बाइक और स्कूटी) के लिए: वाहनों से निकलने वाले पुराने तेल को रिसाइकिल करने के बाद उसमें केमिकल और रंग मिलाकर इंजन ऑयल बनाया जा रहा था। रिसाइक्लिंग के लिए मशीनें लगाई हुई हैं।
एक लीटर ऑयल की 80 रुपये लागत, मुनाफा दोगुना
ट्रांसफार्मर और वाहनों के पुराने ऑयल को फिल्टर करने में 65 रुपये और उसकी पैकिंग में 15 रुपये का खर्च आकर कुल 80 रुपये लागत आ रही थी। फैक्टरी संचालक द्वारा यह नकली ऑयल दुकानदारों को 150 रुपये में बेचा जा रहा था। दुकानदार भी एक लीटर ऑयल पर 250 रुपये कमा रहे थे।