अब नगर निगम के प्रस्ताव पास होने के बाद फाइलों में नहीं दबेंगे। बैठक में पास हुए प्रस्तावों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट निगम अफसरों को बोर्ड बैठक में देनी होगी। अप्रैल से ही नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। हर बोर्ड बैठक में निगम पार्षद पूर्व के प्रस्तावों की समीक्षा रिपोर्ट पर भी चर्चा करेंगे।
दरअसल, बीते तीन साल में नगर निगम में अधिकांश प्रस्तावों पर कार्रवाई ही नहीं हुई। प्रस्ताव पास हुए और फाइलों में बंद हो गए। सभी बैठकें हंगामे की भेंट चढ़ जाती हैं और नए प्रस्तावों पर मंथन की बजाय पुराने प्रस्तावों में उलझकर रह जाती हैं। नगर निगम बोर्ड ने अब हर मीटिंग में एग्जीक्यूशन रिपोर्ट भी पेश किया जाना जरूरी कर दिया है।
एजेंडे की कॉपी के साथ देनी होगी रिपोर्ट
यह एग्जीक्यूशन रिपोर्ट मीटिंग के एजेंडे के साथ पार्षदों को दी जाएगी, ताकि इसका अध्ययन किया जा सके। रिपोर्ट मिलने से पार्षद अपने पूर्व के प्रस्तावों का स्टेटस देख सकेंगे। यह व्यवस्था लागू होने के बाद निगम अफसरों पर भी प्रस्तावों को लागू करने का दबाव रहेगा।