निगम अधिकारियों ने मेयर के चुनावी एजेंडे को ही ठेंगा दिखा दिया है। गुपचुप तरीके से किए गए अफसरों के इस नए ‘खेल’ अब शहर की जनता भी टेंशन में आने वाली है। नगरायुक्त ने 19 अप्रैल के जारी अपने आदेश से साफ कर दिया है कि अब शहर के लोगों को हाउस टैक्स पर मिलने वाली 20 फीसदी की छूट पूरे साल नहीं मिलेगी।
इसके लिए स्लैब तैयार कर दिया गया है। खास बात यह है कि अफसरों ने इसकी जानकारी न तो मेयर को दी और न ही निगम बोर्ड व कार्यकारिणी समिति को। सोमवार को इसकी जानकारी मिली तो पार्षदों ने इसका विरोध किया है। वह मंगलवार को मेयर को ज्ञापन देंगे।
नगर आयुक्त अब्दुल समद ने यह फैसला 19 अप्रैल अफसरों की बैठक बुलाई थी उसी में गुपचुप तरीके से यह फैसला ले लिया गया। नए आदेश के मुताबिक अब 31 जुलाई तक टैक्स जमा करने वालों को 20 फीसदी, अगस्त और सितंबर में टैक्स जमा करने वालों को 15 फीसदी छूट दी जाएगी।
इसके बाद 30 नवंबर तक महज 10 फीसदी छूट दी जाएगी। नवंबर से 31 मार्च तक हाउस टैक्स की रकम जमा करने वालों को छूट नहीं दी जाएगी। बीते वित्तीय वर्ष में भी निगम अफसरों ने 30 नवंबर के बाद छूट देने पर रोक लगा दी थी।
महापौर ने चुनाव के दौरान जनता को यह छूट दोबारा दिलाने का वादा कर उसे पूरा किया। अब निगम अफसरों ने फिर इस पर अंकुश लगा दिया। भाजपा पार्षद मोनिका मित्तल का कहना है कि निगम अधिकारियों ने यह नीतिगत फैसला बिना कार्यकारिणी और बोर्ड के लागू कर सदन का अपमान किया है।
मंगलवार को महापौर को ज्ञापन देकर इसका विरोध करेंगे। आदेश वापस न लिए जाने पर निगम मुख्यालय पर धरना देने की चेतावनी दी है। मेयर अशु वर्मा का कहना है कि इस मामले की जानकारी उन्हें नहीं है। मंगलवार को वह इस पूरे मामले की जांच कराएंगे।