एमपी/एमएलए विशेष कोर्ट के न्यायाधीश विनय कुमार सिंह चतुर्थ ने पूर्व विधायक योगेश वर्मा के जमानती वारंट पर कोर्ट में हाजिर ना होने पर गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। जबकि, ब्लाक प्रमुख सदर हाजी यूनुस ने शुक्रवार को एमपी एमएलए कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने हाजी यूनुस के जमानती प्रार्थनापत्र को स्वीकार करते हुए जमानत दे दी है।
विशेष लोक अभियोजक हितेंद्र वर्मा ने बताया कि 2019 में वादी उपनिरीक्षक नकुल सिहं ने कोतवाली नगर में तहरीर देकर बताया कि वह और दो अन्य उपनिरीक्षक वारंटी चुनाव देखरेख व वाहन चेकिंग अभियान चला रहे थे। इसी दौरान बिना अनुमति देर रात करीब 11 बजे योगेश वर्मा चुनाव सामग्री बांट रहे थे। तत्कालीन लोकसभा प्रत्याशी योगेश वर्मा को चुनाव सामग्री बांटने से मना करने पर वह नहीं माने।
जिसके बाद उनके द्वारा उच्च अधिकारियों को इस संबंध में सूचना दी गई। जिसके बाद अन्य फोर्स भी मौके पर आ गई। तब तक योगेश वर्मा आदि लोग 8 से 10 गाड़ियां लेकर भाग गए। पुलिस फोर्स द्वारा चुनाव प्रचार में उपयोग हुई दो गाड़ियां व दो व्यक्तियों को मौके से पड़़कर जमा तलाशी ली गई।
पूछने पर उन्होंने अपने नाम राजीव भाटी व सौरभ शर्मा बताया। पुलिस दोनों व्यक्ति व गाड़ी को कोतवाली ले गई। साथ ही प्रचार सामग्री को सील किया। भागे हुए व्यक्तियों के नाम पूछने पर दोनों ने बताया कि वह योगेश वर्मा व मोहम्मद हाजी यूनुस को जानते हैं, वह चुनाव प्रचार में यहां पर आए हैं। वादी की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
अब यह मामला अनूपशहर स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई के लिए स्थानांतरित हुआ। आचार संहिता उल्लंघन मामले में एमपी- एमएलए विशेष कोर्ट के न्यायाधीश विनय कुमार सिंह चतुर्थ ने कोर्ट में हाजिर न होने पर पूर्व विधायक योगेश वर्मा को गैर जमानती वारंट जारी करते हुए तलब किया था। लेकिन योगेश अब भी हाजिर नहीं हुए। जिसपर उनके खिलाफ एनबीडब्ल्यू किया गया है। जबकि, युनुस ने आत्मसमर्पण किया और जमानत याचिका डाली। जिस पर सुनवाई के बाद उन्हें जमानत दे दी गई है।