उसकी निशानदेही पर निठारी की डी-5 कोठी के पीछे बने नाले और गैलरी से युवती की चप्पल और दुपट्टा बरामद होने के साथ ही कई नर कंकाल बरामद हुए। डीएनए जांच के बाद युवती की पहचान हुई। इसके बाद 19 मामलों में मुकदमे दर्ज हुए। बाद में सीबीआई ने मामले की जांच करते हुए तीन मामलों में कोई साक्ष्य नहीं मिलने पर क्लोजर रिपोर्ट लगा दी। 16 मामलों में से पंढेर के खिलाफ सिर्फ छह मामले चले। तीन में पंढेर को फांसी की सजा हुई लेकिन बेटी की हत्या और दुष्कर्म के मामले में पिता पहले दिए बयान से मुकर गया और पंढेर सजा से बच गया। इसी मामले में सीबीआई कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को सजा- ए- मौत की सजा सुनाई।
बयान से मुकरने पर जज ने दर्ज कराया था मुकदमा
सीबीआई ने 22 मार्च 2007 को युवती की हत्या के मामले में सुरेंद्र कोली के खिलाफ हत्या और दुष्कर्म के मामले में चार्जशीट पेश की, जबकि पंढेर के खिलाफ सिर्फ देह व्यापार कानून में चार्जशीट पेश की। तत्कालीन सीबीआई जज रमा जैन की अदालत में युवती के पिता ने छह जुलाई 2007 को बयान दर्ज कराया कि मोनिंदर सिंह पंढेर ने मेरे सामने हत्या का जुर्म कबूल किया। मेरे सामने ही पंढेर व सुरेंद्र कोली से हत्या में इस्तेमाल आरी बरामद की थी। इसी बयान के आधार पर अदालत ने पंढेर को आरोपी बनाया। इसके बाद 15 जनवरी 2007 को वह बयान से मुकर गया।
उसने दोबारा बताया कि पंढेर ने न तो मेरे सामने आरी बरामद कराई और न ही हत्या कुबूल किया था। अदालत से कहा कि मैने पहले वाला बयान अपने वकील खालिद खान के कहने पर दिया था। निठारी पीड़ित दो अन्य लोगों ने 19 नवंबर 2007 को अधिवक्ता खालिद खान से सीबीआई कोर्ट में व्यक्ति के खिलाफ बयान से मुकरने का मामला पेश कराया, जिसकी पुष्टि होने पर तत्कालीन सीबीआई जज रमा जैन ने यह मामला दर्ज कराया।
उत्तराखंड में अधिवक्ता के खिलाफ दर्ज कराया था मामला
मृत युवती के पिता ने बाद में उत्तराखंड में अपने ही अधिवक्ता खालिद खान के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था। जांच में फर्जीवाड़ा मिलने पर पुलिस ने एफआर लगाते हुए केस बंद कर दिया था।
हाईकोर्ट ने तीन महीने में निपटाने का दिया आदेश तब आया फैसला
पंद्रह साल से विचाराधीन मामले में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि तीन महीने के अंदर मामले का निस्तारण किया जाए। नौ मई को निर्णय को रोकने के लिए व्यक्ति ने जिला जज की अदालत में डिस्चार्ज अर्जी लगाई, जिसे 13 माई को अदालत ने खारिज कर नियत तिथि पर निर्णय करने का आदेश दिया था। 27 मई को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोषी मानते हुए अंतरिम जमानत अर्जी खारिज कर सजा सुनाई।