जिले में डिप्थीरिया और टिटनेस यानी टीडी से बच्चों को सुरक्षित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है लेकिन कई स्कूल इस अभियान में सहयोग नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार निर्धारित आयु वर्ग के बच्चों को टीडी का टीका लगवाने में स्कूल प्रबंधन कोई रुचि नहीं दिखा रहा है। नतीजतन हजारों बच्चे टीकाकरण से वंचित रह सकते हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
जिले में एक से 31 अगस्त तक टीडी टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत 10 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बच्चों को टीका लगाया जा रहा है। पहले पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों को ही टीडी का टीका दिया जाता था लेकिन हाल के वर्षों में 10 वर्ष से अधिक आयु वाले बच्चों में भी मामले सामने आने लगे हैं। विशेषकर वे बच्चे जिन्हें पूर्व में टीका नहीं लगा था उन्हें अब बूस्टर डोज से आच्छादित किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से सरकार ने स्कूल आधारित विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया है। इसमें स्कूल, कॉलेज और मदरसों में एएनएम और आशा कार्यकर्ता बच्चों को टीका लगा रही हैं।
15 दिन में सिर्फ 13 हजार का हो सका टीकाकरण
15 दिन में 13 हजार बच्चों को टीका लगाया जा चुका है। जबकि 40 हजार से अधिक बच्चों का टीकाकरण किया जाना है। कई निजी स्कूल मनमाना रवैया अपनाते हुए बच्चों को टीकाकरण से दूर रख रहे हैं। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ.नीरज अग्रवाल ने बताया कि पूर्व में भी कई स्कूल अभियान से दूरी बनाए हुए थे। अप्रैल में चले अभियान में जिले के 69 निजी स्कूल शामिल नहीं हुए थे। यही स्थिति अब दोबारा देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में दो बार जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजा जा चुका है लेकिन स्कूलों का रवैया नहीं बदला है। शिक्षा विभाग ने भी निर्धारित आयु वर्ग के बच्चों को टीका लगवाने की अपील की थी, फिर भी कई संस्थान सहयोग नहीं कर रहे हैं।
स्कूल प्रबंधन की तय होगी जिम्मेदारी
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने कहा कि इस बार किन-किन स्कूलों ने टीकाकरण नहीं कराया है इसकी सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद सूची शिक्षा विभाग को सौंपी जाएगी ताकि स्कूलों की जिम्मेदारी तय हो सके। सीएमओ ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग लगातार अपील कर रहा है कि अभिभावक और स्कूल प्रबंधन दोनों इस अभियान में सक्रिय रूप से भागीदारी करें ताकि कोई भी बच्चा टीडी की बूस्टर डोज से वंचित न रहे।