बरसात के कारण हो रहे संक्रमण से बैक्टीरिया से लोग बुखार से बीमार हो रहे हैं। वायरल, जुकाम और शरीर में दर्द मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि बुखार उतरने के बाद भी मरीजों को लंबे समय तक शरीर में दर्द, थकान और कमजोरी की समस्या हो रही है। सामान्यतः शरीर को पूरी तरह स्वस्थ होने में 10 से 15 दिन का समय लगता है। इस दौरान अगर लोग जल्दबाजी में भारी कामकाज शुरू कर देते हैं तो हालत फिर बिगड़ सकती है।
एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ.संतराम वर्मा ने बताया कि कई बार बुखार उतर जाने के बाद भी शरीर के अंदर एलर्जन, सूजन और कमजोरी बनी रहती है। मांसपेशियों में दर्द, थकान और खांसी होती है। यह स्थिति सामान्य है धीरे-धीरे ठीक होती है। लेकिन कई मरीज इसे नजरअंदाज कर जल्दी सामान्य दिनचर्या अपनाने लगते हैं। ऐसे में शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और रिकवरी की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
संयुक्त अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राहुल वर्मा ने बताया कि इस समय रोजाना करीब 150 से 200 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें से कई मरीज ऐसे हैं जो बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाएं ले लेते हैं। उन्होंने कहा कि यह आदत खतरनाक हो सकती है। दर्द निवारक दवाएं लिवर और गुर्दे पर असर डालती हैं और डेंगू जैसे रोगों में प्लेटलेट्स की संख्या को और कम कर सकती हैं। गलत दवा का इस्तेमाल गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकता है। डॉ.वर्मा का कहना है कि बुखार के बाद शरीर को आराम देने की जरूरत होती है। मरीजों को पर्याप्त नींद लेनी चाहिए, पौष्टिक भोजन करना चाहिए और तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाना चाहिए। प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए पपीते के पत्तों का रस, मौसमी फल, नारियल पानी और हरी सब्जियां फायदेमंद होती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि तैलीय और मसालेदार भोजन या बाजार का खाना फिलहाल नुकसानदायक साबित हो सकता है।
शरीर को फिट होने में समय लगता है
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अरविंद डोगरा का कहना है कि मरीजों को यह समझना जरूरी है कि बुखार से ठीक होना केवल शरीर का तापमान सामान्य होने भर से नहीं है। असल में शरीर को पूरी तरह ठीक होने में समय लगता है। जल्दबाजी में सामान्य दिनचर्या अपनाना सेहत को दोबारा खतरे में डाल सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बरसात के मौसम में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और मच्छरों से बचाव करें। किसी भी तरह का असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
नींद और आराम जरूरी
रिकवरी के दौरान मरीजों को सात से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए और दिन में भी आराम करना चाहिए। भोजन हल्का और आसानी से पचने वाला होना चाहिए। पानी, नींबू पानी, नारियल पानी और सूप जैसे तरल पदार्थ अधिक लेना लाभकारी होता है। हल्का व्यायाम या टहलना तभी शुरू करना चाहिए जब कमजोरी कम हो जाए। इसके अलावा बुखार के दौरान और उसके बाद समय-समय पर खून की जांच कराना भी जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए। समय पर इलाज और सावधानी बरतने से न केवल बीमारी से बचाव संभव है बल्कि बुखार के बाद होने वाली लंबी कमजोरी और दर्द से भी राहत मिल सकती है।