दिल्ली से मेरठ तक एनएच-24 पर पूरे दिन मिलने वाले जाम से मार्च 2018 तक निजात मिल जाएगी। 96 किलोमीटर के दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का निर्माण मार्च 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा।
नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के चेयरमैन राघव चंद्रा ने शुक्रवार को एक्सप्रेस-वे के निर्माण की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रेसवार्ता के बाद यूपी गेट से लेकर हापुड तक एनएच-24 का निरीक्षण भी किया।
राघव ने बताया कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के जल्द से जल्द निर्माण के लिए इसे चार पैकेज में बांटा गया है। एक्सप्रेस-वे की शुरुआत सराय काले खां दिल्ली से होते हुए गाजियाबाद में डासना और फिर नई ग्रीन फील्ड एलाइनमेंट के साथ मेरठ तक होगी।
पहले पैकेज में सराय काले खां से दिल्ली-यूपी बार्डर गाजीपुर तक 8.7 किलोमीटर के 14 लेन एक्सप्रेस-वे का निर्माण होगा। इसके निर्माण का टेंडर वेलस्पन कंपनी को दिया गया है, जो अगले पांच महीने में काम शुरू कर देगी।
चेयरमैन ने बताया कि दूसरे पैकेज में यूपी गेट से डासना तक 14 लेन का एक्सप्रेस-वे बनाया जाना है। इसके लिए छोड़े गए टेंडर में एक ही कंपनी से बिड मिली है। ऐसे में, दोबारा बिड मंगाई गई है।
इस बार बिड का वक्त 45 दिन से घटाकर 30 दिन कर किया गया है। तीसरे पैकेज में डासना से हापुड़ तक छह लेन के एक्सप्रेस-वे के निर्माण का टेंडर एपको चेतक कंपनी को दिया गया है। इसका निर्माण भी अगले पांच महीने में दिखने लगेगा।
इस क्षेत्र में अतिक्रमण और लाइन शिफ्टिंग की समस्या है, जिसे दूर करने के लिए यूपी सरकार से बात चल रही है। उन्होंने बताया चौथे पैकेज के तहत डासना से मेरठ तक ग्रीन फील्ड एलाइनमेंट के साथ छह लेन के एक्सप्रेस-वे का निर्माण होगा।
इसके लिए गाजियाबाद एवं मेरठ के 33 गांवों में 464 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, जो अगले दो महीने में जमीन मिल जाएगी। प्रेसवार्ता में एनएचएआई के चीफ जनरल मैनेजर बीएस सिंघला और प्रोजेक्ट डायरेक्टर गाजियाबाद रविंद्र कुमार समेत टेंडर पाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
डासना से मेरठ के एक्सप्रेसवे पर होगा टोल
एनएचएआई के चेयरमैन राघव चंद्रा ने बताया कि डासना से मेरठ तक छह लेन के एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद वहां टोल बनेगा। इस मार्ग पर एक्सप्रेस-वे का संचालन टोल पर रखा जाएगा।
पेड़ों को हटाने के लिए एनजीटी से लेंगे अनुमति
एक्सप्रेस-वे के रास्ते में आने वाले पेड़ों को काटना पड़ेगा, जिसके लिए पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल से अनुमति ली जाएगी, उसके के बाद आगे की कार्रवाई होगी। साथ ही बिजली की लाइनों की शिफ्टिंग के लिए भी बात की जा रही है, जिसे जल्द से जल्द काम शुरू किया जा सके।