इन भावनाओं के साथ, मैंने एक कठिन, परंतु विचारपूर्ण निर्णय लिया है। मैं 2024 के चुनावों में नहीं लड़ूंगा। यह निर्णय मेरे लिए आसान नहीं था, परंतु मैंने इसे अपने दिल की गहराइयों से लिया है। मैं अपनी ऊर्जा और समय को नई दिशाओं में ले जाना चाहता हूँ, जहां अपने देश की सेवा अलग तरीके से कर सकूं।
इस यात्रा में आपके साथी रहने के लिए मैं आप सब को दिल से धन्यावाद देता हूं। आपके प्यार, समर्थन और विश्वास ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है। आगे भी, मैं देश और सब नागरिकों के प्रति अपनी सेवा जारी रखूंगा, बस एक नए रूप में।
अब यही सवाल... गाजियाबाद से पूर्व थलसेना अध्यक्ष की जगह पूर्व वायुसेना प्रमुख या फिर कोई और
गाजियाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा के टिकट दावेदारों में एक और नाम जुड़ गया है। यह नाम है पूर्व वायुसेना प्रमुख राकेश कुमार सिंह भदौरिया का जिन्होंने रविवार को ही भाजपा का दामन थामा है। इसी के साथ अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि भाजपा उन्हें मौजूदा सांसद पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल (रिटायर्ड) विजय कुमार सिंह की जगह उतार सकती है। अब जब उन्होंने चुनाव न लड़ने का एलान कर दिया है तो देखना यह है कि टिकट की बाजी पूर्व थल सेना अध्यक्ष मारते हैं या फिर किसी और को उम्मीदवार बनाया जाता है।
गाजियाबाद को भाजपा हाईकमान सबसे सुरक्षित सीटों में से एक मानकर चलता है। 1991 में यहां पहली बार कमल खिला था। तब से 2019 तक हुए आठ चुनावों में सात भाजपा ने जीते हैं। सातों बार क्षत्रिय उम्मीदवार रहे। चार बार रमेश चंद तोमर जीते, एक बार राजनाथ सिंह और दो बार जनरल रिटायर्ड वीके सिंह। इनमें वीके सिंह की जीत सबसे बड़ी रही। वह दोनों बार पांच लाख से ज्यादा वोटों से जीते।
इसके बावजूद भाजपा उम्मीदवारों की चार सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। मेरठ मंडल की पांच सीटों में से गाजियाबाद और मेरठ से ही टिकट फाइनल नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि दोनों सीटों के टिकट एक दूसरे से जुड़े हैं। पश्चिम यूपी के समीकरण को देखते हुए एक सीट से क्षत्रिय और एक से वैश्य समाज से टिकट दिया जाना है। पिछले चुनावों में भी भाजपा ऐसा करती रही है।
आरके सिंह आगरा के बाह तहसील क्षेत्र के कोरथ गांव के रहने वाले हैं। यह गांव फतेहपुर लोकसभा क्षेत्र में आता है और क्षत्रिय बहुल भी है लेकिन यहां से मौजूदा सांसद राजकुमार चाहर को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है।
कांग्रेस और बसपा ने भी नहीं खोले पत्ते
गाजियाबाद सीट पर अभी तक कांग्रेस और बसपा ने भी पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस में कई दावेदारों के नाम चल रहे हैं। एक -दो कई दिन से सक्रिय भी हैं। ये पहले चुनाव लड़ चुके हैं। देखना यह है कि पार्टी किसी पुराने चावल पर भरोसा करती है या फिर नया चेहरा उतारती है। बसपा यहां मुस्लिम और ब्राह्मण प्रत्याशी उतारती रही है। माना जा रहा है कि उम्मीदवार का एलान होली के बाद होगा।