इस उम्र में हमारी कोई मन्नत नहीं है, हम तो अपने ग्रुप के साथ मस्ती में कांवड़ ला रहे हैं। 70 साल की ओमवती कहती हैं कि मैं तो पहली बार कांवड़ लेने निकली हूं। अपने ग्रुप के साथ आनंद आ रहा है। 64 साल की श्यामवती का कहना है कि हरिद्वार से तो कई बार कांवड़ लाए, लेकिन गंगोत्री देखने का मन थो तो इस बार वहां से कांवड़ ला रहे हैं। हमारे जत्थे में तीन पुरुष और 9 महिलाएं हैं। हम सभी वरिष्ठ नागरिक हैं। कांवड़ के साथ पर्यटन हो रहा है।
कांवड़ संचालक सुनील गोयल का कहना है कि वह एनसीआर में 20 साल से शिविर लगा रहे हैं। पिछले चार, पांच वर्षों में महिलाओं की संख्या बढ़ी है। पहले इक्का, दुक्का दिखती थीं, लेकिन अब अच्छी-खासी संख्या में हर उम्र की दिख रही हैं।
कांवड़ लेने पहली बार निकली अनीता
हाजीपुर की रहने वाली अनीता इस बार पहली बार कांवड़ लेने निकलीं। वह हरिद्वार से जल जा रही हैं। उनका कहना है कि परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना के लिए उन्होंने कांवड़ उठाई है।