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इंदिरापुरम में 3 घंटे तक बवाल

Sun, 19 Jun 2016 12:57 AM IST
गाजियाबाद/ अमर उजाला ब्यूरो
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मिनी ट्रक में आग लगाने की कोशिश - फोटो : अमर उजाला
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मालवाहक में मृत गोवंश मिलने पर शनिवार को न्यायखंड में बवाल हो गया। गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर पुलिस पर पथराव कर दिया, जिसमें एक पुलिसकर्मी घायल हो गया।  मिनी ट्रक में तोड़फोड़ कर आग लगाने की कोशिश की गई। करीब तीन घंटे तक हंगामा चला। पुलिस ने लाठियां फटकार कर भीड़ को खदेड़ा।
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शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे न्याय खंड-1 स्थित इंदिरापुरम मैनेजमेंट कालेज के सामने टाटा-407 (मिनी ट्रक) का एक्सीडेंट हो गया। ड्राइवर वाहन को मौके पर छोड़कर भाग गया।

शनिवार सुबह सात बजे कालेज के सुरक्षा गार्ड और आसपास की लोगों ने वाहन के अंदर देखा तो उसमें गोवंश दिखे। इस दौरान आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। कुछ ही देर में भाजपा, आरएसएस आदि हिंदू संगठन के लोग भी पहुंच गए। वाहन का ताला तोड़ने पर सात गोवंश मृत मिले, जबकि एक बछड़ा जीवित मिला। मृत गोवंश देखकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
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वह हंगामा करने लगे। करीब सवा आठ बजे पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को शांत कराने की कोशिश की। पुलिस ने मृत गोवंश और जीवित बछड़े को नंदीग्राम भेजा और क्रेन मंगाकर मिनी ट्रक को हटाने लगी तो लोग आग बबूला हो गए।

उन्होंने पुलिस पर मामले को दबाने का आरोप लागते हुए  मिनी ट्रक में तोड़फोड़ कर दी और उसमें आग लगाने लगे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका तो लोगों ने उन पर पथराव कर दिया, जिसमें सब इंस्पेक्टर नेत्रपाल घायल हो गए।

उनके सिर में पत्थर लगा और हेलमेट का एक हिस्सा टूटकर उनके सिर में घुस गया। एसपी सिटी सलमान ताज को भी पत्थर लगा, लेकिन हेलमेट पहने होने की वजह से वह चोटिल होने से बच गए।

सीओ इंदिरापुरम अतुल यादव भी बाल-बाल बचे। इस दौरान लोगों ने पेड़ों की टहनियां तोड़कर रास्ता बंद कर दिया और उनके पीछे छिपकर पथराव किया। इस पर पुलिस ने लाठियां फटकारनी शुरू कर दीं, जिससे लोगों में भगदड़ मच गई। भीड़ के भागने पर सुबह करीब 11 बजे हंगामा शांत हुआ।

एसपी सिटी सलमान ताज ने बताया है कि पुलिस ने गोहत्या निवारण, पशु क्रूरता अधिनियम और गलत नंबर का वाहन इस्तेमाल करने की रिपोर्ट दर्ज की है। साथ ही हंगामा करने वाले 350 अज्ञात लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। उधर, हंगामे के दौरान पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।

देर से पहुंचे अधिकारी : पुलिस अफसरों को सुबह करीब आठ बजे ही सूचना मिल गई थी, लेकिन पुलिस और प्रशासन के अधिकारी तीन थानों की पुलिस के साथ करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंचे। तब तक मामला तूल पकड़ चुका था।

यही वजह रही कि अफसरों की कोशिश के बावजूद हंगामा रोका नहीं जा सका। लोगों का आरोप था कि पुलिस आरोपियों को पकड़ने के बजाए मामले को दबाने में जुटी थी। अगर अधिकारी समय रहते पहुंच जाते तो हंगामा होने से बच सकता था।
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