सरकारी मोबाइल का बेजा इस्तेमाल किए जाने पर निगम प्रशासन ने सीयूजी मोबाइल का प्लान बदलवा दिया। अब इन मोबाइल पर इनकमिंग तो है, लेकिन आउटगोइंग नहीं।
कॉल करने की पाबंदी लगाई तो निगम पार्षदों और अफसरों ने इन मोबाइल का इस्तेमाल ही बंद कर दिया। इसकी वजह से जनता परेशान है। उनका पार्षदों और अफसरों से संपर्क करना मुश्किल हो गया है।
वर्ष 2014 में नगर निगम ने पार्षदों और सीनियर अफसरों को सीयूजी मोबाइल इसलिए दिए थे कि वह सीधे जनता से जुड़े रहें। पार्षदों को निगम अफसरों से बार-बार संपर्क करने में भी ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना पड़ता था।
कई पार्षदों और अफसरों ने इनका इतना इस्तेमाल किया कि निगम पर ढाई लाख से ज्यादा का बिल बकाया हो गया। इससे परेशान निगम अफसरों ने बीते साल ही फोन का प्लान ऐसा करा दिया कि पार्षद और अफसर आपस में फ्री कॉल कर सकेंगे, लेकिन बाहरी नंबरों पर फोन नहीं कर सकेंगे। थोड़े दिन तो अफसरों-पार्षदों ने मोबाइल चलाए, लेकिन अब बंद कर दिए हैं।
शिकायत पोर्टल से जुड़े थे सीयूजी नंबर
नगर निगम के आनलाइन शिकायत पोर्टल से अधिकारियों के सीयूजी नंबर जोड़े गए थे। नाली, सीवर, पानी, बिजली की शिकायत पोर्टल पर आते ही ऑटो जनरेटेड मैसेज संबंधित अधिकारियों के मोबाइल पर पहुंच जाता था।
अधिकारी इसका निस्तारण कराते थे। सीयूजी नंबर बंद हो जाने से अब अधिकांश अफसरों तक शिकायत भी नहीं पहुंच पा रही है। निगम का आईटी सेल अब अधिकारियों के पर्सनल नंबर पोर्टल से जोड़ रहा है।
पार्षदों ने जताई सरेंडर की इच्छा
निगम पार्षद मुकेश त्यागी ने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर सरकारी मोबाइल सरेंडर करने की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि इन फोन का इस्तेमाल ही नहीं हो पा रहा तो इन्हें बंद करा दिया जाए। इससे निगम को आर्थिक फायदा भी होगा।