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UP: अस्पताल विवाद की भेंट चढ़े हापुड़ के एसपी और एएसपी, नए पुलिस अधीक्षक ने संभाला चार्ज

Wed, 17 Jul 2024 01:57 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़

सार

हापुड़ के एसपी और एएसपी अस्पताल विवाद की भेंट चढ़ गए। पुलिस सूत्रों की माने तो पिलखुवा के रामा अस्पताल में हुए पूरे प्रकरण की जानकारी जिले के अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों को नहीं दी थी। 
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नए पुलिस अधीक्षक ने संभाला चार्ज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के एसपी अभिषेक वर्मा और एएसपी राजकुमार अग्रवाल का देर रात स्थानांतरण कर दिया गया। उनके स्थान पर मंगलवार सुबह नए एसपी ज्ञानंजय सिंह ने चार्ज संभाल लिया। जबकि एएसपी के स्थान पर विनीत भटनागर को तैनात किया गया है। मामला एक अस्पताल से जुड़ा होने के कारण चर्चाओं में बना हुआ है।
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चर्चा है कि पिलखुवा स्थित रामा मेडिकल कॉलेज में भर्ती बिजनौर के चांदपुर निवासी एक महिला के पुत्र जावेद ने डायल 112 पर शिकायत करते कहा था कि अस्पताल प्रबंधन इलाज में लापरवाही बरत रहा है। शिकायत करने पर उनके साथ बदसलूकी की जा रही है। 

जिसके बाद डायल 112 पुलिस यहां पहुंची थी। आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की। इसकी सूचना मिलते ही एएसपी राजकुमार अग्रवाल समेत भारी पुलिस बल अस्पताल में पहुंचा। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। हालांकि बाद में पुलिस बैकफुट पर भी आ गई थी। मामले में दोनों पक्षों में समझौता कराने के बाद एएसपी वापस लौट आए।
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लखनऊ से फोन घनघनाए तो देर रात पहुंचे आईजी
अस्पताल परिसर को छावनी बनाए जाने की सूचना कालेज स्टाफ ने डायरेक्टर को दी थी। कॉलेज डायरेक्टर ने लखनऊ में बैठे अपने आकाओं को फोन कर दिया। इसके बाद मामले का लखनऊ से संज्ञान लिया गया और मामले की जांच के लिए आईजी नाचिकेता झा पिलखुवा स्थित अस्पताल पहुंच गए। 

यहां अस्पताल के अधिकारियों से उन्होंने पूरी रिपोर्ट ली और इसके बाद लखनऊ के अधिकारियों को ब्रीफ किया। इसके बाद एसपी अभिषेक वर्मा और एएसपी राजकुमार अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया।

 

उच्चाधिकारियों को सूचना न देना पड़ा भारी
पुलिस सूत्रों की माने तो पिलखुवा के रामा अस्पताल में हुए पूरे प्रकरण की जानकारी जिले के अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों को नहीं दी थी। मेरठ में बैठे अधिकारियों से जब लखनऊ से जवाब तलब किया गया तो उन्होंने इस प्रकरण के संबंध में अनभिज्ञयता जताई। 

 
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ऐसे में जांच भी स्थानीय अधिकारियों के पक्ष में नहीं गई। अब पिलखुवा सीओ और कोतवाल पर भी कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है। फिलहाल पुलिस अधिकारी या कालेज प्रबंधन इस मामले में कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
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