दिवाली के बाद आए मौसम में बदलाव और स्मॉग की वजह से प्राइवेट सहित सरकारी अस्पतालों में स्वांस रोगियों और इंफेक्शन के मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। अस्पताल में आने वाले मरीजों में साठ फीसदी मरीज स्वांस की समस्या और सर्दी-जुकाम और गले में इंफेक्शन के हैं। इसके अलावा सबसे अधिक शिशुओं में निमोनिया की समस्या बढ़ी है।
दिवाली के पांच दिन ही बीते हैं और ऐसे मरीजों की संख्या साढे़ चार हजार के पार हो चुकी है।एमएमजी के सीएमएस और चेस्ट फिजिशियन डा. जेके त्यागी ने बताया कि मौसम में बदलाव और प्रदूषण की वजह से पुराने दमा और ब्रान्काटिस के रोगियों को समस्या उभर आती है। ऐसे में जहां तक हो सके बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें।
इसके अलावा आंखों में खुजली, जलन और पानी आने की भी समस्या सबसे अधिक आ रही है। पर अधिक हो सकता है। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण बीमारियों का जल्दी असर होता है। शिशुओं में कफ, चेस्ट इंफेक्शन और सर्दी-जुकाम की समस्या जल्दी आ सकती है।
एमएमजी की बाल रोग विशेषज्ञ डा. शालिनी तिवारी ने बताया कि अस्पताल में अभी शिशुओं में सबसे अधिक समस्या निमोनिया की आ रही है। अस्पताल में रोजाना बच्चों की ओपीडी 200-250 तक की हो रही है। इस बार अधिकतर लोगों की शिकायत है कि सामान्य सर्दी-जुकाम जो एक हफ्ते में ठीक हो जाता था, अब वह पंद्रह दिन के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग में ही तैनात पूजा ने बताया कि पिछले पंद्रह दिनों से गले में इंफेक्शन से पीड़ित हैं। चंद दिन आराम मिलता है और फिर गला बैठ जाता है। इसके साथ ही शरीर में थकावट भी महसूस हो रही है।
स्वांस रोगी - 2250 ( दमा और पुराने स्वांस रोगी अधिक)
सर्दी-जुकाम - 1700 ( गले में इंफेक्शन के मरीज भी शामिल)
आंखों में जलन और इंफेक्शन - 635