कंपनी की योजना सरकार की मदद से हर ग्राम पंचायत स्तर पर ऐसे प्लांट स्थापित करने की है। इससे शहर के साथ हर गांव कूड़ा मुक्त बनाने में मदद मिलेगी। गांव के घरों और कृषि आधारित कूड़े से प्लांट के जरिये पैदा होने वाली बिजली सड़कों और पंचायत भवन और सार्वजनिक स्थानों को रोशन किया जा सकेगा। वहीं सोसायटियों में क्षमता अनुसार प्लांट की मदद से कूड़े का अंदर ही समाधान और सार्वजनिक प्रयोग में होने वाली बिजली के बिल को कम किया जा सकेगा।
प्लांट से पैदा होगी हाइड्रोजन गैस
कंपनी के निदेशक प्रोजेक्ट रामेश्वर दयाल गुप्ता का कहना है कि कंपनी का प्लांट सभी मानकों पर खरा उतरा है। वैश्विक तापमान में वृद्धि के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड जितनी जिम्मेदार है मीथेन गैस उससे 73 फीसदी ज्यादा खतरनाक है। इस संयंत्र में मीथेन गैस को पूरी तरह से खत्म करने के साथ हाइड्रोजन ग्रे गैस पैदा करने की भी क्षमता है। कंपनी को संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक योजना के तहत खाड़ी देश यमन में 100 किलोवाट की क्षमता का प्लांट लगाने का प्रोजेक्ट मिला है।
एबीईएस कॉलेज में लगेगा 30 किलोवाट का प्लांट
कंपनी की वाइस प्रेसिडेंट ऑपरेशन डॉ. नीरजा जिंदल का कहना है कि कंपनी की ओर से एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज में 30 किलोवाट की क्षमता का प्लांट लगाया जाएगा। कॉलेज शोधार्थियों को प्रेरित करने और नए प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में यह कदम है। कॉलेज प्रबंधन से इस संबंध में बातचीत हो चुकी है।