गाजियाबाद। अस्पताल में भर्ती मरीज बीमारी से जूझते हैं और भोजन से स्वास्थ्य लाभ की उम्मीद करते हैं, लेकिन जिला एमएमजी अस्पताल और महिला अस्पताल की कैंटीन में इस व्यवस्था की अनदेखी सामने आई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम के निरीक्षण में दोनों अस्पतालों की कैंटीन के पास खाद्य लाइसेंस नहीं मिला। साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। कैंटीन में ब्रेड पकौड़े अस्वच्छ तेल में तैयार किए जा रहे थे। विभाग ने संचालक से दस्तावेज मांगे हैं और नियमों के तहत कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने जिले के 10 अस्पतालों में मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच की। अधिकारियों ने रसोईघर में रखे कच्चे अनाज, दाल, सब्जी, मसाले और खाद्य तेल की स्थिति देखी। भोजन तैयार करने से लेकर मरीजों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया भी परखी गई। जांच का उद्देश्य यह देखना था कि मरीजों को निर्धारित मानकों के अनुसार ताजा और सुरक्षित भोजन मिल रहा है या नहीं।
दो साल से चल रही कैंटीन का लाइसेंस नहीं
एमएमजी अस्पताल में करीब दो साल से भारत एंड संस के नाम से कैंटीन संचालित है। विभागीय जांच में सामने आया कि इसका पंजीकरण लोनी के पते पर है, जबकि कैंटीन जिला एमएमजी अस्पताल और महिला अस्पताल परिसर में संचालित की जा रही है। दोनों अस्पतालों में संचालन से संबंधित खाद्य लाइसेंस प्रस्तुत नहीं किया जा सका। अधिकारियों ने संचालक से दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है।
निरीक्षण के दौरान रसोईघर में सफाई का भी जायजा लिया गया। खाद्य सामग्री रखने की व्यवस्था, तेल के इस्तेमाल और तैयार भोजन की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया। टीम को कैंटीन में साफ-सफाई की स्थिति ठीक नहीं मिली। ब्रेड पकौड़े अस्वच्छ तेल में बनाए जाते मिले। अधिकारियों ने कैंटीन संचालक को पैक और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
रसोई में भोजन की पूरी प्रक्रिया परखी
एमएमजी अस्पताल, संजय नगर स्थित अस्पताल, महिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की रसोई में भी निरीक्षण किया गया। टीम ने जांचा कि भोजन बनाने में इस्तेमाल होने वाला तेल मानकों के अनुरूप है या नहीं। सुबह और रात के भोजन में अंतर रखा जा रहा है या नहीं, मरीजों को बासी खाना तो नहीं दिया जा रहा और निर्धारित भोजन तालिका के अनुसार खाना पहुंच रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की गई।
प्लास्टिक की प्लेट और भोजन की पैकिंग की गुणवत्ता भी देखी गई। मरीजों और तीमारदारों के लिए कैंटीन में उपलब्ध खाद्य सामग्री की स्थिति जांचने के साथ अस्पताल प्रबंधन को समय से भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
पहले भी दी गई थी चेतावनी
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग सुरेश मिश्रा ने बताया कि कैंटीन पहले भी बिना लाइसेंस संचालित मिली थी। उस समय संचालक को दस्तावेज पूरे कराने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन कागजी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। लोनी के खाद्य सुरक्षा अधिकारी को टीम गठित कर दोबारा खाद्य सामग्री और दस्तावेजों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर कैंटीन संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।