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80 नालों का बोझ सह रही है हिंडन

Tue, 31 May 2016 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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hindon - फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर से गाजियाबाद तक छोटे-बड़े 80 नालों का बोझ हिंडन नदी सह रही है। या यूं कहें कि अब हिंडन की सहनशक्ति भी जवाब दे चुुकी है।  सरकारी तंत्र की अनदेखी और लापरवाही के चलते हिंडन बड़े नाले में तब्दील होती जा रही है।  
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हिंडन जल बिरादरी के मुताबिक हिंडन नदी में सबसे पहला नाला सहारनपुर में स्टार पेपर मिल का गिर रहा है। सबसे बड़ा नाला मुजफ्फरनगर में मंसूरपुर इंडस्ट्रियल एरिया का हिंडन की सहायक काली नदी में गिर रहा है, जो हिंडन में आकर मिलती है।

हिंडन जल बिरादरी के संयोजक विक्रांत शर्मा ने बताया कि गाजियाबाद की बात करें, तो शहर के छह नाले हिंडन में गिरते हैं। पहला नाला लोनी की ट्रॉनिका सिटी इंडस्ट्रियल एरिया से गांव जावली होते हुए फर्रूखनगर के पास गिर रहा है। दूसरा नाला गांव करहेड़ा के पास मोहन नगर इंडस्ट्रियल एरिया का है।
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तीसरा नाला गाजियाबाद शहर का है। यह शमशान घाट स्थित पोस्टमार्टम हाउस के पास से हिंडन में मिल रहा है। चौथा इंदिरापुरम का नाला सीआईएसएफ होते हुए एनएच-24 पर हिंडन में मिलता है। पांचवां नाला विजय नगर-प्रताप विहार का नाला है और छठा नाला कविनगर इंडस्ट्रियल एरिया का है जो क्रॉसिंग रिपब्लिक के पास से हिंडन में गिरता है। इस स्थिति में हिंडन की बदहाल हालत का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
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राजनगर एक्सटेंशन का नाला भी हिंडन में डालने की तैयारी
जल्द ही सातवां नाला भी हिंडन में गिरने वाला है। यह नाला है राजनगर एक्सटेंशन का होगा। जल बिरादरी के सदस्य एडवोकेट दीपेश चौधरी ने बताया कि राजनगर एक्सटेंशन में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए ही हिंडन में पानी डालने की बात है, प्लांट शुरू ही नहीं हुआ है। ऐसे में, गंदा पानी ही हिंडन में डालने की तैयारी की जा रही है।
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एक छोड़कर किसी भी नाले का पानी शोधित नहीं
जल बिरादी के सदस्य धर्मेंद्र निर्वाण ने बताया कि गाजियाबाद के छह नालों में एक छोड़कर किसी भी नाले का पानी ट्रीट कर हिंडन में नहीं जा रहा है। इंदिरापुरम का एसटीपी चलता है। यहां पानी ट्रीट होकर हिंडन में जा रहा है। बाकी नालों का पानी बिना शोधित किए हिंडन में डाला जा रहा है।
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ट्रीटेड पानी को रिसाइकिल कर हो सकती है आमदनी
नागपुर का फार्मूला लागू करें तो रिसाइकिल पानी से नगर निगम और जीडीए आमदनी कर सकते हैं। जल बिरादरी के सदस्य प्रदीप यादव ने बताया कि ‘नमामी गंगे’ योजना के तहत ट्रीटेड पानी को भी नदियों में नहीं डाल सकते हैं। पानी को रिसाइकिल किया जाना चाहिए, जिसका इस्तेमाल हो सके। 

नागपुर में ऐसा ही किया जा रहा है। नगर निगम रिसाइकिल पानी को कंस्ट्रक्शन, खेती, बागवानी के लिए बेचकर आमदनी करता है। यही व्यवस्था गाजियाबाद में भी लागू की जा सकती है। इससे हिंडन का अस्तित्व भी बचा रहेगा और भूजल का स्तर भी बना रहेगा।
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