गाजियाबाद। एमएमएच कॉलेज में हुई वित्तीय अनियमितता के मामले में दो लिपिकों की मुश्किलें भी बढ़ती दिख रही हैं। हाल ही में राजभवन से कराए गए ऑडिट में सामने आया कि लिपिक अमन सिंह व अवनिंद्र ने करीब दो साल तक अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सहायक लेखाकार का काम किया। दोनों लिपिकों से इसका स्पष्टीकरण मांगा गया है।
कॉलेज में सहायक लेखाकार की तैनाती है। जब लिपिकों ने लेखाकार का कामकाज किया, उस वक्त भी सहायक लेखाकार डयूटी पर थे। सहायक लेखाकार अनुज उपाध्याय ने इसपर आपत्ति दर्ज कराते हुए शिकायत भी दर्ज कराई। आरोप है कि दोनों लिपिकों ने बिल वाउचर से लेकर तमाम कार्य किए। इस प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए सरकारी कॉलेजों से सेवानिवृत्त तीन प्राचार्योँ की कमेटी का गठन किया गया है।
11.33 करोड़ की अनियमितता का हुआ है खुलासा : राजभवन से कराई गई जांच में पता चला है कि प्राचार्य पद पर रहते हुए डॉ. पीयूष चौहान ने 11.33 करोड़ की वित्तीय अनियमितता की। इसकी रिपोर्ट जांच रिपोर्ट कमेटी ने शासन को भी भेजी है।
ये है मामला : 15 जुलाई को सहायक लेखाकार अनुज उपाध्याय पर हमला हुआ था। पुलिस के खुलासे में डॉ. पीयूष पर षड्यंत्र रचने का आरोप लगा। अनुज उपाध्याय ने आरोप लगाया कि वित्तीय मामलों में डॉ. पीयूष ने उनपर अनुचित कार्य करने का दबाव बनाया। जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो यह हमला कराया गया। इस मामले में प्रबंध समिति ने पीयूष को निलंबित कर दिया। इसके बाद पीयूष चौहान कोर्ट चले गए। कोर्ट ने भी उनका निलंबन बरकरार रखा।
नहीं की ड्यूटी : डॉ. पीयूष चौहान का निलंबन 14 अगस्त को हुआ था। प्रबंधन ने उनको निलंबन के दौरान लाइब्रेरी में डयूटी करने के आदेश दिए थे, लेकिन उन्होंने ड्यूटी ज्वाइन नहीं की। बीच में दो दिन वह कॉलेज गए। एक बार उन्होंने छुट्टी का आवेदन दिया। इसके बाद से वह कॉलेज नहीं जा रहे।