मोनाड यूनिवर्सिटी की फर्जी वेबसाइट बना 25 जिलों में बेची मार्कशीट
हापुड़। अनवरपुर स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी की फर्जी वेबसाइट बनाकर फर्जी अंक तालिका, प्रमाण पत्र जारी करने के मामले का खुलासा हुआ है। पिलखुवा पुलिस और साइबर सेल ने दो शातिरों को गिरफ्तार करते हुए फर्जी मार्कशीट, मोबाइल और अन्य उपकरण बरामद किए हैं। आरोपी कई दूसरी यूनिवर्सिटी की फर्जी मार्कशीट भी तैयार करते थे। आरोपियों के साथियों की तलाश की जा रही है।
पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने बताया कि कुछ दिन पहले अनवरपुर में स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी की फर्जी वेबसाइट तैयार कर डिग्री, मार्कशीट और ओ-लेवल के फर्जी कंप्यूटर डिप्लोमा जारी करने की शिकायत हुई थी। एसओजी टीम और पिलखुवा पुलिस इसकी जांच में लगाया गया था। सोमवार को पुलिस को सवूचना मिली की इस गिरोह का मास्टरमाइंड हापुड़ आ रहा है। पुलिस ने सीतापुर के थाना रामपुर मथुरा निवासी अमरेश और थाना कोतवाली के शास्त्री नगर निवासी शिवम पाण्डेय को हापुड़ पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया।
इनकी निशानदेही पर पुलिस ने दो एलसीडी मानिटर, दो सीपीयू, दो की-बोर्ड, माउस, कलर प्रिंटर, तीन मोबाइल फोन, 5 मोनार्ड यूनिवर्सिटी की फर्जी मार्कशीट, 30 मार्कशीट व डिप्लोमा बरामद किए हैं। इसके साथ ही ओसो एजुकेशन ग्रुप और मर्हिष दयानंद एजुकेशनल ग्रुप की 11 मोहर , ओम इंजीनियरिंग में नौकरी के 12 फर्जी ऑफर लैटर, तीन फर्जी रसीदें, विभिन्न कंपनी के खाली लेटर पैड और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।
यूनिवर्सिटी के कर्मचारी भी रडार पर
एसपी दीपक भूकर ने बताया कि आरोपी अमरेश और शिवम पाण्डेय अपने गैंग के साथ वर्ष 2018 से सीतापुर से यह फर्जीवाड़ा चला रहे थे। इन लोगों ने करीब 25 जिलों के युवाओं को इन्होंने फर्जी मार्कशीट और प्रमाण बेचे। गिरोह का पूर्वी यूपी के जिलों में नेटवर्क है। ये लोग इस क्षेत्र की यूनिवर्सिटी की मार्कशीट को उस क्षेत्र के युवाओं और उधर की यूनिवर्सिटी की मार्कशीट और प्रमाणपत्रों को इधर के युवाओं को बेचते थे। इस गिरोह में करीब 20 सदस्यों के जुड़े होने की जानकारी मिल रही है। इसमें यूनिवर्सिटी के अंदर के कुछ कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी पुलिस जांच कर रही है।
स्थानीय डाकघर से रजिस्टर्ड डाक से भेजते थे मार्कशीट
युवाओं को मार्कशीट के फर्जी होने का अभास न हो, इसके लिए ये लोग संबंधित क्षेत्र में जाकर ही मार्कशीट डाकघर से पोस्ट करते थे। जैसे कि मोनाड यूनिवर्सिटी की मार्कशीट और प्रमाण पत्र को पिलखुवा से ही संबंधित छात्र को पोस्ट किया जाता था। दोनों आरोपी ऐसी ही मार्कशीट पोस्ट करने के लिए आए थे, और पुलिस ने इन्हें दबोच लिया।
पांच से बीस हजार में बेचते थे मार्कशीट
युवाओं को बिना पेपर मार्कशीट जारी करने का झांसा देकर पांच से बीस हजार में मार्कशीट बेचते थे। ओ लेवल और दूसरे कंप्यूटर डिप्लोमा के लिए पांच हजार रुपये, बीएससी, एमएससी की तीनों वर्षों की मार्कशीट के लिए 20 हजार वसूलते थे।