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हाथ, हैंडपंप और साइकिल...बिगाड़ सकते हैं कमल का ‘खेल’

Tue, 17 Jan 2017 10:19 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद। ‘ट्रिपल यूथ’ गठबंधन को लेकर एक और जहां सपा, कांग्रेस के बीच सहमति बन गई है, वहीं रालोद को लेकर अभी ऊहापोह की स्थिति है। दूसरी ओर इस गठबंधन को लेकर भाजपा भी टेंशन में हैं।
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल, अखिलेश और जयंत का यह गठबंधन अगर होता है तो वेस्ट यूपी में भाजपा प्रत्याशियों को जीत हासिल करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पडे़गी।

हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों से सबक लेते हुए इस बार यूपी चुनाव में सपा, रालोद और कांग्रेस गठबंधन के मूड में हैं। इन तीनों बडे़ राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन की चर्चा काफी समय से चल रही हैं। अब पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
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भाजपा अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा भी कर चुकी है। ऐसे में अब सभी की नजर इस गठबंधन पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक मामलों के जानकार एवं वरिष्ठ स्तंभकार कुलदीप तलवार का कहना है कि दलित एवं मुस्लिम बाहुल्य मतदाता के चलते पूर्वांचल में भाजपा के मुकाबले सपा और बसपा का जनाधार ज्यादा है।

जबकि वेस्ट यूपी की राजनीति में रालोद भी अहम स्थान रखती है। इसके अलावा अखिलेश यादव, राहुल गांधी और जयंत चौधरी के प्रशंसकों की भी खासी संख्या है। ऐेसे में तीन बडे़ दलों की यह गठबंधन की राजनीति भाजपा प्रत्याशियों को परेशान कर सकती है।

हालांकि उनका यह भी कहना है कि गठबंधन के बाद भी इन दलों के बीच अगर सीट बंटवारे को लेकर विवाद नहीं होता है, तभी भाजपा पर इसका असर पडे़गा। सीट बंटवारे की संख्या और प्रत्याशियों की अच्छी छवि से ही कांग्रेस, सपा और रालोद को गठबंधन का फायदा मिलेगा।

मुस्लिम वोटर्स को मिल सकता है प्लेटफार्म:
वेस्ट यूपी में मुस्लिम मतदाताओं को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। मुस्लिम मतदाताओं पर सभी पार्टियों की नजर रहती है। यही कारण है कि सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद द्वारा वेस्ट यूपी में कई सीटों का बंटवारा मुस्लिम मतदाताओं को ध्यान में रखकर किया जाता है।

ऐसे में सपा, कांग्रेस और रालोद के बीच होने वाला गठबंधन मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। अकेले गाजियाबाद जनपद की ही बात करें तो यहां पांचों विधानसभा में करीब पौने पांच लाख मुस्लिम मतदाता हैं।

आंकडे़ बताते हैं कि साहिबाबाद में करीब 2 लाख, लोनी में 1.25 लाख, गाजियाबाद में 56 हजार, मोदीनगर में 55 हजार और मुरादनगर में करीब 45 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। इस गठबंधन के बाद मुस्लिम वोटरों को एक प्लेटफार्म मिल सकता है।
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