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पांच लोगों की मौत के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार

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पांच लोगों की मौत के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार
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गाजियाबाद। राकेश मार्ग पर दुकान में उतरे करंट से तीन बच्चियों सहित पांच की मौत हो जाने के बाद भी शहर की गलियों में हवा में झूलते तारों को हटाया नहीं गया। ऊर्जा निगम की ओर से बृहस्पतिवार को तारों को हटाने, बदलने या ठीक कराने की कोई मुहिम शुरु नहीं की गई। प्रशासन ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया है। जगह तो बिजली के खंभे भी लकड़ी की बल्लियों के सहारे टिके हैं। तेज हवा चलते ही इनके गिरने का खतरा रहता है। अमर उजाला टीम इन कॉलोनियों में पहुंची तो लोगों ने बताया कि शिकायत के बाद भी इन तारों को ठीक नहीं किया जा रहा है।
1. पटेलनगर : घरों को छूकर निकली रही बिजली की लाइन
बिजली की लाइन घरों की छत से छूकर निकल रही है। कई जगह बिजली के तार नंगे हैं। दो खंभों में कई बार करंट उतर चुका है। लाइनमेन को इसकी जानकारी दे चुके हैं। बिजली घर में शिकायत भी की लेकिन तार नहीं हटाए गए। 2500 की आबादी है। कॉलोनी के ही राजू का सवाल है कि अगर हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदारी लेगा?
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वर्जन
ये तार 15 साल से नहीं बदले गए हैं, कई बार टूट चुके हैं, इनसे हादसे का डर बना हुआ है - सन्नी, पटेलनगर
महाराणा प्रताप नगर : बालकनी में लटके बिजली के तार
महेंद्रा एंक्लेव के इस क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति जर्जर तारों के हवाले है। लोगों के घरों के बाहर खंभों से 70 से 60 बिजली के तार एक-दूसरे से उलझे हुए हैं। कई जगह ये बालकनी में लटके हैं। तारों से उठती चिंगारी के बाद आग लगने की घटनाएं भी क्षेत्र में हुई हैं। कॉलोनी के चंद्रप्रकाश ने बताया, बारिश में डर रहता है कि तारों से करंट न फैल जाए।
वर्जन
बिजली अधिकारियों से व्यवस्थित तरीके से तार करने के लिए कई बार कहा गया है। बालकनी में बच्चों के जाने पर भी डर बना रहता है।- अमित त्यागी,
महाराणा प्रताप नगर
लेबर चौक, विजयनगर : बल्लियों के सहारे खड़ा खंभा
लेबर चौक पर बीचों-बीच लगा बिजली का खंभा बल्लियों की बैसाखी पर खड़ा है। योजनाओं के प्रस्ताव में हाईटेक बिजली व्यवस्था है लेकिन विद्युत सुरक्षा कहीं दिखाई नहीं देती। करीब एक साल से बिजली का खंभौ जुगाड़ के हवाले है। हम सिर्फ तस्वीर दिखा सकते हैं और दुआ कर सकते हैं न खंभा गिरे और ना ही हादसा हो। स्थानीय निवासी संजय बिंदल का कहना है कि खंभे को बजाय हटाने या सही करवाने के बिजली विभाग के अधिकारी इसे बल्लियों के सहारे खड़ा कर गए हैं। ऐसे में मकानों पर खंभा गिरने का डर बना हुआ है।
वर्जन
बिजली के खंभे के अलावा क्षेत्र में जगह-जगह बिजली के तार हवा में लटक रहे हैं। बारिश के दिनों में अक्सर तारों में करंट आने का खतरा बना रहता है।
- महेश अग्रवाल, लेबर चौक
घंटाघर बाजार : तारों का मकड़जाल
रिहायशी क्षेत्रों के अलावा शहर के प्रमुख बाजार भी बदहाल बिजली व्यवस्था का हिस्सा हैं। दिल्ली गेट पर हाइटेंशन लाइन में तारों के बीच दूरी बनाने के लिए लकड़ियां लगाई गई हैं जबकि घंटाघर बाजार में तारों के जाल से जब कोई तार टूटकर जमीन पर गिरता है तो ट्रेफिक को भी रोकना पड़ जाता है। कारोबारी प्रवीण शर्मा ने बताया, बाजार में अक्सर तार टूटकर नीचे गिर जाता है, लोगों को हादसों से बचाने के लिए तब तक ट्रैफिक रोकना पड़ जाता है, जब तक तार जोड़ने का काम नहीं हो जाता।
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वर्जन
दिल्ली गेट बाजार में पहले भी कई बार दुर्घटनाएं तारों की वजह से हुई हैं। स्थायी समाधान के बजाय अधिकारी काम चलाऊ प्रयोग करते हैं।
- उदयन गर्ग, घंटाघर
चेक करने के दिए निर्देश
पुर्नोत्थान वितरण क्षेत्र योजना के तहत जिले में सर्वे पूरा हुआ है, जिसके आधार पर बिजली संबंधी कार्य कराए जाने हैं। इससे पहले सभी खंडों में निर्देश जारी किए गए हैं कि जर्जर तार, खंभे और ट्रांसफार्मर को चेक कराएं, इनकी सूची बनाकर सुरक्षा नियमों को ध्यान में रखकर कार्य कराया जाए।
- पंकज, मुख्य अभियंता
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