रैपिड कॉरिडोर में 80 फीसदी प्री-कास्ट तकनीक का इस्तेमाल, प्रदूषण पर प्रहार
गाजियाबाद। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ में रैपिड रेल कॉरिडोर के काम को तय समय सीमा में पूरा करने के उद्देश्य से 80 फीसदी काम प्री-कास्ट तकनीक (पूर्व में निर्मित सीमेंट ब्लॉक व अन्य निर्माण सामग्री) की मदद से किया जा रहा है। प्री-कास्ट तकनीक का ही परिणाम है कि रैपिड के पहले 17 किमी लंबे साहिबाबाद से दुहाई तक प्राथमिकता खंड में निर्माण संबंधी 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। रैपिड के एलिवेटेड ट्रैक, रेल लाइन, वसुंधरा पर बने धनुषाकार पुल सहित सभी स्टेशनों के निर्माण में भी प्री-कास्ट तकनीक इस्तेमाल हो रही है। इसी का परिणाम है कि पहले खंड में सिविल संबंधी कार्य अप्रैल तक पूरा होने की संभावन जताई जा रही है।
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प्री-कास्ट यार्ड में 24 घंटे चल रहा काम, तकनीक पर डाले नजर:
एनसीआरटीसी की ओर से रैपिड कॉरिडोर में निर्माण की सभी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्री-कास्ट तकनीक के तहत एनसीआरटीसी ने वसुंधरा और मेरठ में प्री-कास्टिंग यार्ड की स्थापना की है। यहां रैपिड के एलिवेटेड ट्रेक के सीमेंट से बने बड़े प्री-कास्ट ब्लॉक का 24 घंटे निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं, रैपिड के सभी स्टेशनों में फाउंडेशन से जुड़े बड़े सीमेंट के ब्लॉक का निर्माण भी यार्ड में चल रहा है। इस प्री-कास्ट सीमेंट के ब्लॉक को तैयार होने के बाद बड़े व्यावसायिक वाहनों से निर्माण साइट पर लाया जाता है। फिर उसे बड़ी बड़ी क्रैन की मदद से एलिवेटेड के बनाए गए पिलर और स्टेशनों पर रखा जाता है। इससे समय की बचत हो रही है।
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प्री-कास्ट से प्रदूषण रोकने में भी मदद:
करीब 30 हजार करोड़ के रैपिड प्रोजेक्ट में प्री-कास्ट तकनीक के इस्तेमाल से एनसीआरटीसी को प्रदूषण पर रोकथाम में मदद नहीं मिल रही है। एलिवेटेड ट्रैक के पिलर को छोड़कर बाकी ट्रैक को वसुंधरा यार्ड में तैयार किया जा रहा है। ऐसे में साइट पर एनसीआरटीसी को कम से कम निर्माण कार्य करना पड़ रहा है। सीमेंट के बड़े ब्लॉक को उच्च क्षमता की मशीनों के जरिए एलिवेटेड ट्रैक रखा जाता है। ऐसे में निर्माण संबंधी अधिकांश काम वसुंधरा स्थित एनसीआरटीसी के यार्ड में किया जा रहा है। इससे बड़े प्रोजेक्ट के बावजूद वायु प्रदूषण की संभावना बेहद कम हो गई है।
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कोट..
प्री-कास्ट से सुरक्षा हो रही सुनिश्चित:
प्री-कास्ट तकनीक समय बचाने, प्रदूषण को कम करने के साथ सुरक्षा में सहायक है। निर्माण संबंधी अधिकांश काम प्री-कास्ट तकनीक से होने और फिर विशेषज्ञों की टीम उसे उच्च क्षमता की मशीनों से स्थापित करती है। प्री-कास्ट निर्माण सामग्री से साइट पर निर्माण संबंधी गतिविधि बेहद कम रहे गई है। ऐसे में लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई है। -- पुनीत वत्स, सीपीआरओ, एनसीआरटीसी
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