रजिस्ट्री कार्यालय पर वकीलों ने लगाया ताला, दो घंटे चला हंगामा
गाजियाबाद। पावर ऑफ अटार्नी के पंजीकरण में गड़बड़ी की शिकायत पर बैठी जांच के बाद रजिस्ट्री विभाग फूंक फूंककर कदम रख रहा है। बाहर के पंजीकरण पर रोक लगा दी गई है। सोमवार को एक अधिवक्ता और लिपिक के बीच रजिस्ट्री को लेकर कहासुनी हो गई। नाराज अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री दफ्तर पर ताला लगा दिया और हंगामा करने लगे। करीब दो घंटे तक हंगामा चलता रहा। अधिकारियों और बार के पदाधिकारियों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ। इस दौरान रजिस्ट्री कराने आए लोगों को काफी दिक्कत हुई।
सुबह साढ़े दस बजे दो अधिवक्ता सदर तहसील में रजिस्ट्री दफ्तर पहुंचे। यहां पर रजिस्ट्री हो री थी, एक अधिवक्ता ने मुआयना करने की बात कही, जिस पर लिपिक ने मना कर दिया, कहा कि अभी रजिस्ट्री का काम होगा। इस पर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। बात बढ़ने पर अन्य अधिवक्ता मौके पर पहुंच गए और हंगामा होने लगा। अधिवक्ताओं ने मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान रजिस्ट्री कराने आए काफी लोग अंदर ही रह गए। 12.30 बजे तक हंगामा चलता रहा और रजिस्ट्री का काम भी बाधित रहा। मौके पर उप निबंधक के नहीं होने पर अधिवक्ताओं ने अधिकारी से बात की और विरोध जताया। बार एसोसिएशन के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और अधिकारियों से बातचीत की। इसके बाद मामला रफादफा हुआ। इस मौके पर एक मीडियाकर्मी से बदसलूकी का भी आरोप है। बार तहसील बार एसोसिएशन अध्यक्ष पंकज शर्मा एडवोकेट का कहना है कि लिपिक के गलत व्यवहार पर नाराजगी हुई थी। कोषाध्यक्ष दीपक वार्ष्णेय का कहना है कि कुछ लोग कुछ कर्मियों से मिलीभगत कर गलत तरीके से पावर ऑफ आटर्नी का पंजीकरण कराना चाहते हैं, इसका विरोध किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का सही काम भी कुछ कर्मी नहीं करना चाहते हैं। फिलहाल मामला रफादफा हो गया है।
जांच की आंच से कइयों को दिक्कत
पावर आफ अटार्नी के पंजीकरण में किए जा रहे खेल पर ब्रेक लग गया है। गत दिनों अमर उजाला ने पंजीकरण में गड़बड़ी की शिकायत पर शासन द्वारा जांच कराने के आदेश को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। मामले में जांच चल रही है। उधर आईजी स्टांप की ओर से स्थानीय उप निबंधन कार्यालय में आदेश आ गया है कि अब पंजीकरण उसी पावर ऑफ अटार्नी का किया जाएगा जो एक्ट में दिए गए नियमों के मुताबिक होगा। इस आदेश के बाद जो फर्जीवाड़ा हो रहा था उस पर रोक लग गई है। इससे काली कमाई करने वाले कई लोगों को दिक्कत हो रही है। एआईजी स्टांप केके मिश्र ने बताया कि जांच कराई जा रही है। आईजी के आदेश मिला है उसका शत प्रतिशत अनुपालन कराया जाएगा। नियम के मुताबिक पावर ऑफ अटार्नी करने वाला या कराने वाला स्थानीय जिले का होना चाहिए। या फिर संपत्ति जिले की सीमा में होनी चाहिए। फिलहाल अभी जीपीए के पंजीकरण पर रोक लगा दी गई है।