लंबी दूरी का ई-वे बिल जनरेट कर बीच में उतार रहे माल
गाजियाबाद। सप्लाई के लिए लखनऊ तक ई-वे बिल जनरेट करने के बाद आगरा में माल उतार दिया जाता है। किसी भी चेकिंग प्वाइंट पर पकड़ में आने पर लखनऊ तक का ई-वे बिल अधिकारियों को दिखा दिया जाता है, लेकिन बीच में माल उतारने के बाद टैक्स चोर ई-वे बिल को कैंसिल कर देते हैं। जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स चोरी करने वाले नए-नए तरीकों से राजस्व को चूना लगाने का काम कर रहे हैं।
जीएसटी में माल की आवाजाही को लेकर ई-वे बिल व्यवस्था लागू की गई है। सप्लायर को अपनी और माल खरीदने वाली डिटेल को पोर्टल पर अपलोड कर बिल जनरेट करना होता है। ऐसे में व्यापार की आवाजाही को लेकर वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों के पास ऑनलाइन जानकारी होती है लेकिन नए-नए तरीकों से कई टैक्स माफिया राजस्व की चोरी कर रहे हैं। लंबी दूरी के ई-वे बिल के अलावा एक ई-वे बिल पर दो बार माल का परिवहन जैसे मामले वाणिज्य कर विभाग ने पकड़े हैं।
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एक महीने में 313 मामले पकड़े :
ई-वे बिल में गड़बड़ी जैसे 313 मामले वाणिज्य कर विभाग ने नवंबर में पकड़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिल की स्क्रीनिंग के बाद पकड़े गए वाहनों से पांच करोड़ की टैक्स चारी सामने आई। इन मामलों में अधिकारियों ने टैक्स और पेनल्टी को जमा कराया।
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नवंबर में की गई जांच :
वाहनों की जांच - 14437
ई वे बिल की जांच - 13617
ई वे बिल में गड़बड़ी - 313
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रेलवे के आउटर एरिया के रास्ते टैक्स चोरी :
अनुबंधित बसों में माल सप्लाई के अलावा रेलवे के आउटर एरिया पर भी टैक्स चोरी धड़ल्ले से की जा रही है। दिल्ली से माल लाने वाले लोग आउटर एरिया पर ट्रेन की रफ्तार कम होने पर माल को उतार देते हैं, यहां मौजूद उनके साथी माल को गंतव्य तक पहुंचाते हैं।
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विभाग की मोबाइल टीमें ई-वे बिल की आड़ में की जा रही टैक्स चोरी को पकड़ने के लिए लगाई गई हैं। हाईवे पर वाहनों की जांच में टीमों को लगाया गया है। इसके अलावा मुखबिर तंत्र को भी अलर्ट किया गया है।
- यूएस दुबे, एडिशनल कमिश्नर, ग्रेड-2
वाणिज्य कर विभाग
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