अंगुलियों के निशान चुराकर
खाता साफ कर रहे जालसाज
गाजियाबाद। साइबर अपराध के नए-नए हथकंडे अपनाने वाले जालसाजों ने अब बायोमीट्रिक को हथियार बनाया है। विभिन्न स्रोतों से बायोमीट्रिक डाटा हासिल कर जालसाज एईपीएस (आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम) के जरिये खातों से रकम निकाल रहे हैं। आधार कार्ड व पैन कार्ड बनवाने, पेमेंट निकालने, विभागों में हाजिरी लगाने, रजिस्ट्री कराने और खाद व राशन लेने में बायोमीट्रिक मशीनों का इस्तेमाल होता है। साइबर ठग सर्वर पर सुरक्षित उंगलियों के निशानों का डाटा चुराकर क्लोन फिंगर फ्रिंट (दस्ताना) बनाते हैं। इसका इस्तेमाल कर खातों से रकम साफ कर रहे हैं। दिल्ली, शामली, गाजियाबाद में अभी तक सात केस सामने आए हैं और अन्य जिलों में मामले सामने आ रहे हैं। ठग गिरोह बिहार में रकम निकाल रहा है। शिकायतें मिलने के बाद गाजियाबाद पुलिस ने जांच कर ठगों की तलाश शुरू कर दी है।
खाद लेने वालों और रजिस्ट्री कराने वालों का डाटा लीक
हाल ही में साइबर ठगी के ऐसे पीड़ित सामने आए हैं, जिन्होंने खाते से रकम निकलने से 7 से 10 दिन पहले बायोमीट्रिक सिस्टम से खाद खरीदी थी। कुछ पीड़ित ऐसे भी सामने आए हैं, जिन्होंने ठगी होने से पहले रजिस्ट्री कराई थी। ऐसे में साइबर एक्सपर्ट मान रहे हैं कि खाद लेने वाले किसानों और रजिस्ट्री कराने वाले लोगों के बायोमीट्रिक डाटा में साइबर ठगों ने सेंधमारी की है।
आउट सोर्सिंग पर लगे कर्मचारियों पर शक
अधिकांश विभागों या संस्थानों में बायोमीट्रिक डाटा सुरक्षित करने का जिम्मा निजी एजेंसियों द्वारा किया जा रहा है। जिन्होंने आउट सोर्सिंग पर कर्मचारी रखे हुए हैं। अंदेशा है कि लालच में आकर इन्हीं कर्मचारियों द्वारा बायोमीट्रिक डाटा लीक किया जा रहा है। हालांकि, साइबर एक्सपर्ट कह रहे हैं कि गैंग पकड़े जाने के बाद ही पता लग सकेगा कि उन्होंने बायोमीट्रिक डाटा कहां से हासिल किया।
बैंक कर्मचारी भी रडार पर
बायोमीट्रिक मशीनें बैंक द्वारा आवंटित की जाती हैं। इसके लिए दस्तावेज, मोबाइल नंबर, केवाईसी के अलावा अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। सवाल यह है कि इतनी संख्या में बायोमीट्रिक मशीनें साइबर ठगों के हाथ कैसे लग गईं। जबकि बायोमीट्रिक मशीनें सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) को पर्याप्त वेरिफिकेशन के बाद जारी किया जाता है। ऐसे में बैंककर्मी भी पुलिस के रडार पर हैं।
रकम लौटाने के लिए बैंक जिम्मेदार
अगर खाताधारक ने ट्रांजेक्शन नहीं की है और खाते से संबंधित जानकारी शेयर नहीं की है, ऐसे में ग्राहकों को संरक्षण देने के लिए आरबीआई ने गाइडलाइन जारी की हुई है। खाताधारक चार कार्यदिवस में बैंक को शिकायत देकर रसीद प्राप्त कर लें। इसके बाद बैंक रकम का भुगतान करने का जिम्मेदार होगा। 28 दिन में निस्तारण न होने पर आरबीआई लोकपाल में शिकायत कर सकता है।
आधार को कर सकते हैं ऑन-ऑफ
बायोमीट्रिक डाटा चोरी होने से बचाने के लिए यूएडीएआई.जीओवी.इन पर जाकर आधार कार्ड को ऑन या ऑफ किया जा सकता है। एईपीएस के माध्यम से ट्रांजेक्शन करने या किसी अन्य कार्य के लिए कोई वेरिफिकेशन करने के दौरान आधार को ऑन कर दें। कार्य समाप्त होने पर ऑफ कर दें। आधार कार्ड ऑफ होने के बाद बायोमीट्रिक का इस्तेमाल कर खाते से रकम नहीं निकाली जा सकती। एम-आधार एप के जरिये भी आधार कार्ड को ऑन-ऑफ किया जा सकता है।
- कर्मवीर सिंह, साइबर एक्सपर्ट, मेरठ जोन पुलिस
इनके खाते किए साफ
गाजियाबाद
- कविनगर थानाक्षेत्र केशास्त्रीनगर निवासी अन्नू कपूर के खाते से 28999 रुपये निकाले।
- नगर कोतवाली के न्यू आर्य नगर निवासी कैलाश राजपूत के खाते से 60 हजार रुपये निकाले।
- मोदीनगर के गोविंदपुरी निवासी अमित कुमार शर्मा के खाते से 20 हजार रुपये साफ किए।
- कौशांबी थानाक्षेत्र के भोवापुर निवासी शिवराज सिंह के खाते से 23,750 रुपये निकाले गए।
शामली
- झिंझाना थानाक्षेत्र के गांव पकड़ीपुर निवासी सनोज के खाते से एक लाख रुपये निकले।
- शामली के गांव बनत निवासी बारू के खाते से 29 हजार रुपये निकाल लिए गए।
दिल्ली
- लालबाग आजादपुर दिल्ली निवासी अरविंद यादव के खाते से 9999 रुपये उड़ाए।
हेल्पलाइन 155260 पर करें शिकायत
ऑनलाइन ठगी होने पर हेल्पलाइन 155260 पर शिकायत दर्ज कराई सकती है। cybercrime.gov.in पर भी शिकायत कर सकते हैं। ठगी के शिकार होने पर कहीं जाने की जरूरत नहीं है। यूपीकॉप एप के जरिये भी घर बैठे शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
बिहार का गैंग कर रहा ठगी
किस बायोमीट्रिक मशीन से रकम निकली है, उसकी जानकारी की जा रही है कि वह किस बैंक से जारी हुई थी। बैंक कर्मचारी व कंपनियों के आउटसोर्स कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। अधिकांश मामलों में रकम बिहार से निकाली गई है।
- सुमित कुमार, साइबर सेल प्रभारी, गाजियाबाद