वाटर प्लांटों पर प्रशासन मेहरबान, तीन दिन बाद भी कार्रवाई सिफर
गाजियाबाद। शहर के 15 आरओ प्लांट और 18 होटलों के पानी में पेचिश का बैक्टीरिया ई-कोलाई पाया गया था। जांच रिपोर्ट तैयार कर स्वास्थ्य विभाग ने चार दिन पहले सिटी मजिस्ट्रेट को भेज दी। बावजूद इसके अभी तक प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने शहर के 60 आरओ वाटर प्लांट और होटलों में सप्लाई हो रहे पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे थे। बीमारी बांटने वाला यह बैक्टीरिया युक्त पानी शहर के करीब 30 हजार घरों में सप्लाई किया जा रहा है। प्रशासन के अधिकारियों ने दूषित पानी आपूर्ति करने वाले इन 15 आरओ प्लांट को बंद कराने का दावा किया था।
भूजल दोहन के लिए परिषद से लेनी होती है अनुमति
शहर में भूजल दोहन कर व्यावसायिक उपयोग करने के लिए जिला भूजल प्रबंधन परिषद से एनओसी लेनी अनिवार्य है। डीएम की अध्यक्षता वाली इस कमेटी में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, सिंचाई विभाग, कृषि विभाग, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और जल निगम के अधिकारी समेत कई अन्य विभाग के अधिकारी सदस्य होते हैं।
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हर साल तीन मीटर नीचे खिसक रहा भूजल स्तर
गाजियाबाद शहर को 1995 में ही नोटिफाई एरिया में शामिल कर लिया गया था। अतिदोहित इस क्षेत्र में व्यावसायिक उपयोग के लिए बोरिंग करने पर रोक लगी हुई है। जिन संस्थानों को सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी ने अनुमति दे रखी है, उनके लिए भी शर्तें निर्धारित हैं। इसके बावजूद शहर में धड़ल्ले से बोरिंग कर जल दोहन किया जा रहा है। इसके चलते हर साल भूजल स्तर करीब तीन मीटर नीचे खिसक रहा है। कई इलाकों में यह यह गिरावट और भी ज्यादा है।
आकाश वशिष्ठ, सदस्य, जिला भूजल प्रबंधन परिषद
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जिले में सैकड़ों की संख्या में अवैध रूप से पानी के आरओ प्लांट चल रहे हैं। परिषद की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे प्लांटों पर अंकुश लगाए। फिल्टर पानी के नाम पर यह दूषित पानी बेचकर बीमारी बांट रहे हैं। इन पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
विक्रांत शर्मा, पर्यावरण विद
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अधिकारी बोले
मुख्यमंत्री का कार्यक्रम होने की वजह से पिछले दो दिनों से अधिक व्यस्तता रही। इस वजह से कार्रवाई नहीं कर सके। मंगलवार से अभियान चलाकर इस तरह चल रहे प्लांटों को बंद कराने के साथ दूषित पानी बेचने का मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
गंभीर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट