पथरी का ऑपरेशन पांच हजार महंगा, दवाओं-उपकरणों के दाम भी 30 फीसदी बढ़े
गाजियाबाद। चीन से कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद अब डीजल के दाम बढ़ने से इलाज भी महंगा हो गया है। दवाइयों और आपरेशन में प्रयोग होने वाले सर्जिकल सामानों के दाम 15 से 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गई है। इसकी वजह से निजी अस्पतालों में सामान्य डिलीवरी से लेकर पथरी के सामान्य ऑपरेशन पांच से 10 हजार रुपये तक महंगे हो गए हैं। वहीं बीपी, शुगर से लेकर अन्य जीवन रक्षक दवाओं के दाम में बढ़ोतरी होने से लोगों का मंथली इलाज खर्च बढ़ गया है।
सर्वाधिक बिकने वाली बुखार की दवा पैरासिटामॉल का दाम डेढ़ गुना बढ़ गया है। एक माह पहले तक 38 रुपये में मिलने वाले 10 गोली की कीमत 45 रुपये हो गई है। इसी तरह एंटीबायोटिक व ह्रदय रोग की दवाओं और मल्टी विटामिन दवाओं के दाम में भी वृद्धि हुई है। पैरासिटामॉल ऐसी दवा है जो बुखार के हर मरीज को दी जाती है। ऐसे में बुखार के मरीज से लेकर हर बीमारी का इलाज खर्च बढ़ गया है। वहीं, कच्चे माल की कमी से
मौजूदा समय में सिरिंज की आपूर्ति भी प्रभावित हो गई है। वहीं राहत की बात यह है कि डेंगू के मामले कम होने से अब अस्पतालों में बेड खाली होने लगे हैं और ऑपरेशन के लिए मरीजों को भर्ती किया जाने लगा है। ऐसे में ऑपरेशन की बैकलॉग अब खत्म होने लगी है।
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एंटीबायोटिक के मूल्य पर भी पड़ा असर
इसका असर दवाओं की कीमत पर पड़ा है। एंटीबायोटिक मोनोसेफ का 10 गोली का पत्ता एक माह पहले 154 रुपये में था जो अब 169 रुपये का हो गया है। मल्टी विटामिन के दाम में भी 25 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। जो 10 गोली 100 रुपये में आती थी, अब उसकी कीमत 125 रुपये हो गई है। दवाई कारोबारियों का कहना है कि दिसंबर तक कीमत में और उछाल आ सकता है।
जिला अस्पताल में नहीं बढ़े शुल्क
पथरी, एपेंडिक्स, हार्निया, पाइल्स समेत अन्य जनरल सर्जरी प्रतिदिन की जा रही है। अस्पताल में सर्जरी की ओपीडी शुरू हुई है। शासन ने कोई शुल्क नहीं बढ़ाया है। शासन ने बड़े ऑपरेशन के 450 और छोटे ऑपरेशन के 150 रुपये तय किया है। उतनी ही फीस ली जा रही है। - डॉ.अनुराग भार्गव, सीएमएस एमएमजी अस्पताल
दवाइयों और सर्जिकल सामान के दाम 15 से 40 फीसदी बढ़ गए हैं। इससे छोटे अस्पतालों को नुकसान हो रहा है, जबकि कार्पोरेट अस्पताल इसका फायदा उठा रहे हैं। छोटे अस्पताल संचालक खर्च में कटौती कर किसी तरह मामले को नियंत्रित कर रहे हैं। - डॉ. राजीव अग्रवाल, सर्जन एवं सचिव प्रदेश आईएमए
सर्जिकल सामानों के दाम बढ़ने के साथ ही कई सामानों की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस समय सिरिंज सहित कई चीजों की कमी बनी है। - अंकुर सिंघला, थोक दवाई विक्रेता
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चीन से आने वाला साल्ट सिर्फ तीस फीसदी ही आ पा रहा है। इससे दवाओं के दाम बढ़ने लगे हैं। कंपनियों को भारत व अन्य देशों से साल्ट खरीदने पड़ रहे हैं। इनकी अपेक्षा चीन के साल्ट सस्ते आते हैं। वहां से जरूरत के मुताबिक साल्ट कंपनियों को नहीं मिल पा रहे हैं। - राजदेव त्यागी, जिलाध्यक्ष गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन।
दवाइयों एवं सर्जिकल पर एक नजर
दवाई - पहले दाम - अब दाम
कांबिफ्लैम (बुखार) - 38 - 41.87
एसिलॉक - 23.90 - 36.96
जिफी (एंटीबायोटिक) - 99 - 107
मोनोसेफ (एंटीबायोटिक) - 154 - 169
बीपी मशीन - 550 - 800
ओवल स्पैकुलम - 280 - 450
नी इंप्लांट - 650 - 750
सिरिंज - 110 - 140
आईवी टेस्ट - 09 - 10.50
आईवी फ्लूड - 20 - 22
नेबुलाइजर - 700 - 900
कैनुला - 4.57 - 6
नोट: यह रेट थोक मार्केट के हैं। खुदरा दर इससे अलग है।
ऑपरेशन - पहले - अब
सामान्य प्रसव - 12 से 15 - 20 से 25
सिजेरियन - 35 से 45 - 40 से 50
पित्त की पथरी - 30 से 35 - 35 से 40
गुर्दे की पथरी - 30 से 35 - 40 से 45
हार्निया - 30 से 35 - 35 से 40
पाइल्स - 20 से 22 - 25 से 30
प्रोस्टेट -30 से 35 - 40 से 45
अपेंडिक्स -27 से 30 - 35 से 40
नोट: खर्चा हजार रुपये में है। अलग-अलग अस्पतालों के अलग-अलग रेट भी हो सकते हैं।