गिरीश को हाईकोर्ट से राहत नहीं, निचली अदालत में जाने के निर्देश
गाजियाबाद। नरेश त्यागी हत्याकांड में फरार चल रहे विधायक अजीत पाल त्यागी के भाई गिरीश पाल त्यागी को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल सकी। हाईकोर्ट ने गिरीश पाल त्यागी को निचली अदालत में जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निचली अदालत को आदेश दिया है कि अगर गिरीश की तरफ से जमानत अर्जी आती है तो कोर्ट उस पर जल्द से जल्द सुनवाई करे और कानून के मुताबिक फैसला दे।
9 सितंबर 2020 को लोहिया नहर में मॉर्निंग वॉक के दौरान भाजपा विधायक अजीत पाल त्यागी के मामा नरेश त्यागी की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। नवंबर 2020 में पुलिस ने खुलासा किया था कि विधायक के भाई गिरीश पाल त्यागी ने ही भाड़े के शूर्ट्स से मामा की हत्या कराई थी। जितेंद्र त्यागी ने शूटर मुहैया कराए थे। पुलिस ने सद्दीक नगर निवासी जितेंद्र त्यागी और मनोज कुमार के अलावा डिफेंस कॉलोनी मोदीनगर निवासी अर्पण चौधरी तथा सोंदा रोड मोदीनगर निवासी विपिन शर्मा को गिरफ्तार किया था। जबकि लोहियानगर निवासी गिरीश पाल त्यागी घटना के बाद से ही फरार चल रहा है। नरेश त्यागी के परिजनों ने मोर्चा खोलते हुए पुलिस पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई न करने का आरोप लगाया तो एक बार फिर आरोपी खेमे में हलचल शुरू हो गई थी। इसी कड़ी में गिरीश पाल त्यागी ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। उसने निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने या जमानत लेने के लिए दो माह तक गिरफ्तारी पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी।
हाईकोर्ट ने मोहलत देने की अर्जी की खारिज
नरेश त्यागी हत्याकांड में वादी की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनोज नागवंशी ने बताया कि हाईकोर्ट ने गिरीश पाल त्यागी की दो माह की मोहलत देने की अर्जी खारिज कर दी है। साथ ही कहा है कि वह निचली अदालत के जरिये प्रक्रिया अपनाएं। साथ ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिए है कि गिरीश पाल त्यागी की तरफ से जमानत अर्जी आने पर जल्द से जल्द सुनवाई करे।
आठ नवंबर को सरेंडर कर सकता है गिरीश
गिरीश पाल त्यागी ने 26 अक्तूबर को कोर्ट में सरेंडर की अर्जी लगाई थी। उसे 27 अक्तूबर को सरेंडर करना था, लेकिन वह कोर्ट नहीं आया। इसके बाद कोर्ट ने उसे 29 अक्तूबर व 1 नवंबर को सरेंडर करने की मोहलत दी थी। बीमारी का हवाला देने पर कोर्ट ने गिरीश को सरेंडर का आखिरी मौका देते हुए 8 नवंबर की तारीख निर्धारित की हुई है। हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर गिरीश पाल त्यागी आठ नवंबर को सरेंडर कर सकता है।
------------
पीड़ित पक्ष की पैरवी कर रहे वकील को मिला गनर
गाजियाबाद। 19 अक्तूबर को नरेश त्यागी के बेटे अभिषेक त्यागी ने प्रेसवार्ता कर पुलिस पर राजनीतिक दबाव में गिरीश पाल त्यागी को गिरफ्तार न करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि गिरीश के छोटे भाई अजीत पाल त्यागी वर्तमान में सत्तापक्ष के विधायक हैं, जबकि पिता राजपाल त्यागी पूर्व केबिनेट मंत्री हैं। उन्होंने गिरीश व जमानत पर बाहर आ चुके जितेंद्र त्यागी से जान का खतरा जताया था। इसके बाद उनकी तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनोज नागवंशी ने भी डीएम-एसएसपी से अपनी जान का खतरा बताकर सुरक्षा मांगी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने बुधवार को उन्हें गनर मुहैया करा दिया। मनोज नागवंशी ने बताया कि उन्हें एक सशस्त्र सुरक्षाकर्मी मिल गया है।