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डेंगू के हर 10वें मरीज को चढ़ानी पड़ रही प्लेटलेट्स

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डेंगू के हर 10वें मरीज को चढ़ानी पड़ रही प्लेटलेट्स
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गाजियाबाद। जिले में लगातार डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस समय सबसे अधिक परेशानी हो रही है कि डेंगू की चपेट में आने वाले हर दसवें मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ रही है। कई मरीजों को प्लेटलेट्स के छोटे पैक चढ़ाने से इलाज हो रहा है, लेकिन सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हो रही है जिनको जंबो पैक चढ़ाने की जरूरत पड़ रही है।
ब्लीडिंग होने के बाद आवश्यक हो जाता है प्लेटलेट्स चढ़ाना
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वीबी जिंदल का कहना है कि डेंगू बुखार भी अन्य बुखार की तरह ही है। किसी भी बुखार में प्लेटलेट्स कम होती है, लेकिन जरूरत तभी पड़ती है जब लगातार ब्लीडिंग हो रही हो। पहले डोनर नहीं मिल रहे हैं, अगर मिलते भी हैं तो प्लेटलेट्स निकालने में लंबा समय लगने से भी परेशानी हो रही है।
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31 नए मरीज मिले
डीएसओ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि बृहस्पतिवार को 103 लोगों की डेंगू जांच की गई थी। इसमें दो स्वास्थ्य कर्मियों समेत 31 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। एंबुलेंस का एक चालक भी डेंगू की चपेट में आ गया है। नए मरीजों में से 21 को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मुरादनगर में डेंगू के 12 नए मरीज मिलने के साथ ही कुल संख्या 123 पर पहुंच गई हैं। 91 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। 29 सरकारी और 62 मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। अब तक 413 मरीजों का अस्पतालों में भर्ती किया जा चुका है। मुरादनगर के अलावा इंदिरापुरम, वसुंधरा, विजयनगरए नंदग्राम, पटेलनगर, लोनी, मोदीनगर,कविनगर, लालकुआं और लोहिया नगर में भी डेंगू के मरीज प्रतिदिन मिल रहे हैं।
1.5 से 4 लाख होनी चाहिए प्लेट्लेट्स
एमएमजी अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एके विश्वकर्मा का कहना है कि प्रति माइक्रो लीटर खून में 1.5 से 4 लाख प्लेटलेट्स होना चाहिए। ओपीडी में पहुंचे मरीजों की जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि तेज बुखार में आंतरिक रक्तस्राव का खतरा बढ़ा है। डेंगू, चिकनगुनिया, फ्लू एवं अन्य वायरल संक्रमण में प्लेटलेट्स गिरने के बाद इसकी भरपाई में भी दोगुना वक्त लग रहा है। बोनमैरो में प्लेटलेट्स बनाने की प्रवृत्ति पर भी असर पड़ा है।
क्या है प्लेटलेट्स
पैथोलॉजिस्ट डॉ. हीरालाल शर्मा का कहना है कि प्लेटलेट्स थाली के आकार की कोशिकाएं हैं, जो रक्त में थक्का बनाने की प्रवृत्ति पैदा करती हैं। इनकी उम्र पांच से नौ दिन की होती है। चोट एवं खरोंच के बाद रक्तस्राव रोकने के लिए प्लेटलेट्स जरूरी है। इसकी कमी से थ्रांबोसाइटोपेनिया बीमारी पैदा होती है। इसमें बोनमैरो प्लेटलेट्स बनाना कम कर देती है या शरीर प्लेटलेट्स का यूज कर लेती है।
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ओपीडी में पहुंचे बुखार के 587 मरीज
बारिश के बाद वायरल और बुखार के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिला एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में कुल 2425 मरीज इलाज कराने पहुंचे थे। इनमें बुखार के 587 मरीज शामिल हैं। सीएमए डॉ. अनुराग भार्गव ने बताया कि अस्पताल में 127 मरीज भर्ती हैं। सात मरीजों को रेफर किया गया है। डेंगू वार्ड में पांच मरीजों की हालत खराब है। संयुक्त अस्पताल में भी डेंगू के 18 मरीज भर्ती हैं। इमरजेंसी में एक बेड पर बुखार के दो- दो मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।
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