30 हजार में फर्जी डिग्री, 20
हजार में बेच रहे थे मार्कशीट
गाजियाबाद। जिले में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाला गैंग सक्रिय है। मोदीनगर में चेकिंग के दौरान फरार हुए एक युवक का मोबाइल खंगालने पर पुलिस को इस बात का पता चला। पुलिस के मुताबिक, गैंग के सदस्य 20 हजार में यूपी बोर्ड तो 30 हजार रुपये में यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री बना रहे थे। एसपी ग्रामीण की एसओजी टीम संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
एसपी ग्रामीण की एसओजी टीम मोदीनगर में चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध युवक स्कूटी पर आता दिखाई दिया। पुलिस को देखकर वह घबरा गया और मोबाइल व स्कूटी छोड़कर भाग गया। उसका मोबाइल खंगाला तो पुलिस भी चौक गई। उसमें तमाम फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां भरी पड़ी थीं। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के घर दबिश दी तो वह फरार मिला, जबकि परिवार वाले भी भूमिगत हो चुके थे। पुलिस ने मोबाइल का डाटा खंगाला तो कई अन्य लोग भी फर्जी मार्कशीट बनाने को गोरखधंधे में लिप्त मिले, जिसके बाद उनकी तलाश शुरू कर दी है।
कई जिलों में सक्रिय है फर्जी मार्कशीट गैंग
पुलिस का मानना है कि फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाला गैंग दिल्ली-एनसीआर के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सक्रिय है। अब तक पांच लोगों के नाम पुलिस की जांच में सामने आए हैं, जिनके खिलाफ सुबूत जुटाए जा रहे हैं। साथ ही उनकी गतिविधियां व आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।
फर्जी डिग्री व मार्कशीट बनवाने वालों की भी तलाश
फरार युवक के मोबाइल में 20 से अधिक लोगों से व्हॉट्सएप कॉल मिली है। साथ ही कुछ लोगों से चैटिंग में फर्जी मार्कशीट और डिग्री का आदान-प्रदान भी मिला है। जिन लोगों से व्हॉट्सएप चैट की गई, पुलिस उनकी तलाश में भी जुट गई है। साथ ही, फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनवाने वाले लोगों की खोजबीन भी की जा रही है।
शादी और प्राइवेट नौकरी के इच्छुक लोग निशाने पर
पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य उन लोगों को अपना निशाना बनाते थे, जिनकी शादी में पढ़ाई आड़े आती थी, या फिर जिन लोगों को प्राइवेट नौकरी के लिए डिग्री और मार्कशीट की जरूरत पड़ती थी। इसके लिए गैंग के सदस्य 20 से 30 हजार रुपये तक वसूलते थे।
पहले भी जेल जा चुका है आरोपी
जो युवक मोबाइल व स्कूटी छोड़कर फरार हुआ, वह धोखाधड़ी के मामले में पहले भी जेल जा चुका है। करीब चार माह पहले ही वह जेल से छूटा है। फरार होने के बाद पुलिस उसके परिजनों से मिली तो उन्होंने युवक को वर्तमान में किसी गलत कार्य में होने की सफाई दी, लेकिन उसके मोबाइल ने सारा राज खोल दिया। एसपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा का कहना है कि फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह के बारे में अहम जानकारी मिली है। उस पर काम किया जा रहा है।