दो युवतियों की तलाश के लिए पीड़ित
से गाड़ी मांगने का आरोपी दरोगा निलंबित
गाजियाबाद/लोनी। दो लापता बहनों की तलाश के लिए उनके पिता से गाड़ी की मांग करने के आरोपी दरोगा लव कुमार को एसएसपी अमित पाठक ने बुधवार को निलंबित कर दिया । उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने उत्तराखंड के टिहरी तक के लिए सिर्फ गाड़ी ही नहीं, दरोगा और तीन सिपाहियों के रहने और खाने का इंतजाम भी किया। इसके लिए उन्हें तीन गाय बेचनी पड़ीं। पत्थर गिरने से कार क्षतिग्रस्त हो गई तो उसकी मरम्मत भी कराई।
मामला लोनी का है। 18 और 21 साल उम्र की दो बहनें 20 जून को लापता हुई थीं। वे घर से दिल्ली आईटीआई जाने की कहकर निकली थीं, शाम को वापस आना था लेकिन लौटी नहीं। उनके मोबाइल स्विच ऑफ होने पर काफी खोजबीन करने पर भी कुछ पता न चला तो पिता लोनी थाना पहुंचे। उनका कहना है कि पुलिस ने पहलो तो थाने के चक्कर कटवाए। कहते रहे कि मोबाइल सर्विलांस पर लगे हैं, रिपोर्ट आने पर कुछ किया जाएगा। लोकेशन टिहरी के आने पर दरोगा 10 जुलाई को दरोगा लव कुमार ने कहा कि गाड़ी मिलेगी, तब दबिश देने जाएंगे। जिन तीन युवकों पर शक है, उनमें से एक ही लोकेशन टिहरी की थी।
दरोगा इस पर अड़ गए कि गाड़ी मिलने पर ही जाएंगे, तब उनके और उनकी टीम के लिए इंतजाम करने पड़े। उस समय पैसे नहीं थे, इसलिए तीन गाय बेचनी पड़ीं। गाड़ी, खाने और ठहरने का इंतजाम होने पर ही पुलिस टीम रवाना हुई। पीड़ित से पैसे खर्च कराने की जानकारी मिलने पर दो दिन पहले एसएसपी ने इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। एसपी देहात ने जांच कर रिपोर्ट सौंपी। उधर दरोगा लव कुमार का कहना है कि उन्होंने गाड़ी की मांग नहीं की। उनकी खुद की गाड़ी पहाड़ों पर चढ़ने लायक नहीं है, इसका पता चलने पर पीड़ित ने खुद ही कहा था कि वह दोस्त की गाड़ी दिला देंगे। खाने-पीने का खर्च भी उससे नहीं लिया, अपनी जेब से दिया।
दबिश का कुल खर्च 40 हजार रुपये आया
1. दरोगा के कहने पर गाड़ी का इंतजाम किया, इसका किराया करीब साढ़े 14 हजार रुपये था।
2. पुलिस टीम के एक दिन के ठहरने और खाने-पीने में लगभग 11 हजार रुपये खर्च हुए।
3. पत्थर गिरने से कार क्षतिग्रस्त हो गई, उसे ठीक कराने में 15 हजार रुपये लगे।
बेटियां फिर भी नहीं मिलीं
पीड़ित का कहना है कि उनकी गाय बिक गई, पुलिस ने जैसा कहा, वैसे किया, महीने भर से चक्कर काट रहा हूं, जिन आरोपियों के नाम-पते और मोबाइल नंबर दे चुका हूुं, फिर भी मेरी बेटियों को पुलिस ढूंढ नहीं पाई है। आखिर अब किससे शिकायत करूं।
कोट
लापरवाही बर्दास्त नहीं
दरोगा लव कुमार को पीड़ित की गाड़ी से दबिश देने नहीं जाना चाहिए था। उसे विवेचना फंड का इस्तेमाल करना चाहिए था या फिर खुद अपने खर्च से दबिश देने के बाद बिल पास करा लेता। इसी लापरवाही के चलते उसे निलंबित किया गया है।
- अमित पाठक, एसएसपी
विवेचना के लिए फंड की है यह व्यवस्था
- पुलिस मुख्यालय से हर जिले को विवेचना फंड आवंटित होता है, इससे दबिश में आने वाले खर्च दिए जाते हैं।
- विवेचना फंड थानों में आवंटित कर दिया जाता है या जिन थानों में ज्यादा विवेचना होती हैं, उन्हें ज्यादा दिया जाता है।
- फंड आवंटित न होने पर विवेचकों द्वारा लगाए गए बिलों का भुगतान फंड से हो सकता है।
- अगर फंड कम है और विवेचना में खर्चा ज्यादा हो जाता तो पुलिस मुख्यालय को मांग-पत्र भेजा जाता है। वहां से ग्रांट स्वीकृत हो जाती है।
( एसएसपी के मुताबिक)