कोरोना के इलाज में सात अस्पतालों ने की मनमानी वसूली
केस-1- कोरोना की दूसरी लहर के बीच राजनगर एक्सटेंशन निवासी महिलाओं को बेड खाली न मिलने पर अपने पति को वाराणसी में भर्ती कराना पड़ा। इसके बदले नोएडा की साईं एंबुलेंस सर्विस ने पांच लाख रुपये वसूले। पीड़ित महिला ने डीएम ने शिकायत की तो उनका मामला पहले से अस्पतालों की जांच कर रही मजिस्ट्रेट वाली कमेटी को भेज दिया गया। एंबुलेंस एजेंसी से नोटिस भेजकर जवाब मांगा तो उसने एक लाख रुपये जवाब देने से पहले लौटा दिए। इसके बाद कमेटी ने नोटिस के जवाब पर सवाल उठाए तो एजेंसी ने दो लाख रुपये और लौटा दिए।
केस-2- प्रताप विहार स्थित निजी अस्पताल ने कोरोना का इलाज करने के नाम पर चार लाख छह हजार से अधिक रुपये का बिल बना दिया। मामले में पीड़ित पक्ष की तरफ से सुनील कुमार ने प्रशासन की जांच कमेटी के सामने शिकायत की। इसके बाद अस्पताल को नोटिस भेजा गया। कार्रवाई होने से पहले अस्पताल की तरफ से ढाई लाख रुपया लौटाया गया। इसके बाद दोनों पक्षों में समझौता होने का दस्तावेज कमेटी के सामने रखा गया। हालांकि धनराशि वापस करने संबंधी कोई दस्तावेज, संशोधित बिल प्रस्तुत नहीं किया गया।
गाजियाबाद। कोरोना की दूसरी लहर में अस्पतालों ने इलाज के नाम पर मनमानी वसूली की। प्रशासन की जांच कमेटी ने अपनी जांच में सात अस्पतालों को ओवर बिलिंग के मामले में लिप्त मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश की। इनमें शहर के कई नामचीन अस्पताल भी शामिल हैं। कमेटी ने माना है कि इन्होंने सरकार की तरफ से निर्धारित दरों से कहीं ज्यादा चार्ज लगाकर इलाज खर्च वसूला, लेकिन दो महीने की जांच के बाद भी कमेटी यह स्पष्ट आख्या नहीं दे पाई है कि किस मरीज पर कितना अधिक चार्ज किया। आधी अधूरी रिपोर्ट को लौटाते हुए डीएम राकेश कुमार सिंह ने विस्तृत आख्या के साथ रिपोर्ट देने को कहा है। खासकर कमेटी बताए कि मरीज से कितना अधिक वसूला गया।
प्रशासन की निगरानी वाली तीन सदस्य कमेटी ने सात अस्पतालों की आठ रिपोर्ट सीएमओ को दीं, जिसके बाद सीएमओ ने कार्रवाई के लिए रिपोर्ट डीएम के पास भेजीं। जांच कमेटी ने किसी भी अस्पताल की रिपोर्ट में यह नहीं लिखा कि उसने कितनी ओवर बिलिंग (अधिक कीमत) ली। सात रिपोर्ट में उसने तीन बिंदुओं का विशेष तौर पर उल्लेख किया। एक अस्पताल की रिपोर्ट में विस्तृत ब्योरा दिया है। बाकी की रिपोर्ट में पहले बिंदु बताया कि शिकायत कितने रुपये की हुई और उस पर नोटिस जारी कर अस्पताल से जवाब मांगा। उसके बाद दूसरे बिंदु में लिखा कि अस्पताल ने मरीज से समझौता करते हुए धनराशि (संख्या लिखी) लौटाई, लेकिन उसका कोई साक्ष्य या संशोधित बिल नहीं दिया। तीसरे बिंदु में कहा गया कि इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि अस्पताल ने अन्य मरीजों से भी निर्धारित दरों से अधिक वसूले हैं। रिपोर्ट के अंत में आपदा प्रबंधन अधिनियम और अन्य शासनादेश के तहत नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति कर दी। कमेटी ने कहीं यह नहीं लिखा कि उनकी जांच में कितने रुपये का ओवर बिल था। उन्होंने अपनी जांच में क्या पाया?
दो कमेटियां लेकिन फिर भी दो महीने में जांच पूरी नहीं
दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में ओवर बिल्डिंग की शिकायत पर जनता की नाराजगी को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने जांच की मांग उठाई थी। इस पर जांच के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने अपर नगर मजिस्ट्रेट विनय कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश कुमार और वित्त एवं लेखा अधिकारी पंचायत अभिषेक जैन की तीन सदस्य कमेटी बनाई, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना के सामने आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में जांच की मांग रख दी। नाराजगी के बीच नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में अलग से कमेटी बनाई गई लेकिन पुरानी कमेटी को भी भंग नहीं किया। बल्कि तीन सदस्य कमेटी को शिकायतों पर जांच करने का जिम्मा दिया गया और नगरायुक्त की कमेटी को सभी अस्पतालों के अधिकतम मूल्य वाले पांच प्रतिशत बिलों की जांच की जिम्मेदारी दी। अभी नगरायुक्त की रिपोर्ट आनी बाकी है।
अस्पतालों ने नहीं दिया नोटिस का जवाब
कमेटी द्वारा दो-दो बार नोटिस जारी करने के बावजूद कई अस्पतालों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया तो कुछ अस्पताल प्रबंधन ने जवाब दाखिल किया कि मरीज के तीमारदार की ओवर बिलिंग वापस कर दी गई है और हम दोनों का आपस में समझौता हो गया है। उसके आगे कोई दस्तावेज भी नहीं दिया।
25350 रुपये पीपीई किट के नाम पर वसूले
क्लियरमेडी अस्पताल में 25350 रुपये एक मरीज से पीपीई किट के नाम पर वसूले। जबकि पीपीई किट के दाम अलग से लिए जाने पर रोक थी। सेेमी प्राइवेट रूम का 17 हजार रुपये, आईसीयू का 22 हजार रुपये, 46 हजार रुपये की आक्सीजन और बाईपेप के नाम पर चार्ज किए। अस्पताल ने बिल में 50 हजार रुपये डॉक्टर के विजिट चार्ज लिए गए। आलोकी अस्पताल प्रताप विहार ने रेमडेसिविर बाहर से खरीदने को मजबूर किया।
इन अस्पतालों में हुई ओवर बिलिंग और अनियमितता की शिकायत
यशोदा अस्पताल नेहरू नगर - 3,49,200
यशोदा अस्पताल नेहरू नगर - 5,91,245
गायत्री अस्पताल लोहिया नगर - 3,55,332
क्लीयर मेडी अस्पताल वसुंधरा - 2,084,64
सर्वोदय अस्पताल कविनगर - 1,42,920
फ्लोरिस अस्पताल प्रताप विहार - 4,05,828
अटलांटा अस्पताल वसुंधरा - रेमडेसिविर इंजेक्शन का अतिरिक्त दाम 2495.34
आलोकी अस्पताल प्रताप विहार - बाहर से मरीजों को रेमडेसिविर खरीदने के लिए मजबूर किया गया।
कमेटी ने रिपोर्ट में कहीं पर भी नहीं लिखा है कि अस्पताल ने कितनी धनराशि निर्धारित दरों से अधिक वसूली हुई। कार्रवाई से पहले हमारे पास पुख्ता साक्ष्य होने चाहिए कि अस्पताल ने कहा पर नियमों को तोड़कर अधिक कीमतें वसूलीं। इसलिए कमेटी से कहा कि वो स्पष्ट आख्या दें और बकाएं कि कितनी अधिक वसूली हुई। - राकेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी