- कारोबार न होने से खाली बैठे आभूषण के कारीगर
- महाराष्ट्र, बंगाल और मथुरा के कई कारीगर लौट गए घर
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण का प्रभाव न सिर्फ सराफा कारोबार पर पड़ा है बल्कि कारोबार से जुड़े कई कारीगर बेरोजगार हो गए हैं। किसी ने दो महीने से दुकान, मकान का किराया नहीं दिया तो किसी के सामने बच्चों की फीस देने का संकट है। जिले में महाराष्ट्र, बंगाल और मथुरा से आकर काम करने वाले आभूषण के कारीगर कोरोना कर्फ्यू से पहले घर लौट चुके हैं। हाल यह है कि जिन कारीगर की दुकानों पर काम आता था, वो अब बाजार में जाकर तलाश कर रहे हैं।
गाजियाबाद सराफा एसोसिएशन के मुताबिक कोरोना में सराफा बाजार को 150 करोड़ से अधिक का नुकसान का अनुमान है। लगातार दूसरे साल अक्षय तृतीया और शादियों का सीजन पिटने से नुकसान उठाना पड़ा। बाजार में कारोबार सुस्त होने का असर कारीगरों पर पड़ा और कई कारीगर काम मिलने की तलाश में सराफा की दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं। जिले में महाराष्ट्र, बंगाल, राजस्थान और मथुरा से सोने, चांदी के कारीगर काम करने आते हैं। लगभग ढाई से तीन हजार कारीगर सोने-चांदी के आभूषण तैयार करना, ढलाई, पॉलिश सहित अन्य काम करते हैं। एक कारीगर पर सामान्य दिनों में तीन से चार हजार रुपये रोज का काम रहता था। सुबह से आभूषण तैयार करने का सिलसिला रात तक चलता था। सराफा कारोबारियों का कहना है कि अनलॉक के बाद भी बाजार में अभी काम नहीं निकल रहा है।
रोजगार ठप, खर्चे बढ़े
बिजली का बिल, दुकान का किराया, मकान का किराया जमा नहीं हुआ। पहले दिन में काम से फुर्सत नहीं थी, अब काम मिलता भी है तो औने-पौने दाम में करना पड़ रहा है।
- शिवशंकर, आभूषण कारीगर
सामान्य दिनों में पांच से छह अंगूठी प्रतिदिन बनाता था। अब काम न होने से दो महीने का दुकान का किराया भी नहीं दिया।
- राजू , अंगूठी कारीगर
35 साल से काम कर रहे हैं। कोरोना शुरू होने के बाद से कारोबार ठप है। इसके ऊपर लगातार घर-दुकान के खर्चे हो रहे हैं। 5500 रुपये लाइट का बिल है। बच्चों की फीस भी जमा नहीं हुई।
- सतीश जाधव, आभूषण कारीगर
दो महीने से खाली हैं। पहले दुकान पर चलकर काम आता था। अब पूछना पड़ता है। लगातार खर्च में भी राहत नहीं मिल रही है।
- विजय पाल, आभूषण कारीगर
कोरोना कर्फ्यू के बाद ज्यादा परेशानी हुई है। काम एक फीसदी ही रह गया है। गुजर-बसर लायक काम ही बाजार में रह गया है।
- पोंटी, आभूषण कारीगर
ये है व्यापारियों की मांग
कोरोना से कारोबार बेपटरी हुआ है। ऐसे में हॉलमार्क की तलवार कारोबारियों पर लटक रही है। हॉलमार्क कानून को साल भर के लिए स्थगित किया जाए। कारीगरों को सरकारी योजनाओं का प्राथमिकता पर लाभ दिलाया जाए। सराफा बाजार 10 बजे के बाद खुलता है, ऐसे में सुबह दस से रात आठ बजे का समय निर्धारित किया जाए।
- राजकिशोर गुप्ता, संरक्षक
गाजियाबाद सराफा एसोसिएशन