गिरीशपाल त्यागी की जमानत अर्जी खारिज : राजनीतिक प्रभाव से गवाहों को डरा सकता है आरोपी : कोर्ट
गाजियाबाद। मामा के हत्या का आरोपी पूर्व मंत्री के बेटा गिरीशपाल त्यागी की जमानत अर्जी खारिज हो गई। अपर सत्र न्यायाधीश रामचंद्र यादव ने कहा कि अभियुक्त को अगर जमानत पर छोड़ा जाता है तो उसके फरार होने या अपना राजनीतिक प्रभाव बनाते हुए गवाहों को डराए या धमकाए जाने से इंकार नहीं किया जा सकता है। गिरीश 8 नवंबर 2021 से डासना जेल में बंद है।
मंगलवार को जमानत अर्जी का विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा ने कहा कि अभियुक्त गिरीश पाल त्यागी ने सहअभियुक्त के साथ मिलकर षडयंत्र रचा है। अभियुक्त के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद है। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि गिरीशपाल त्यागी अपनी पत्नी और बेटे को निकाय चुनाव लड़ाना चाहता था, लेकिन मृतक अजीतपाल के पक्ष में थे। इसी कारण से उनके बीच पारिवारिक व राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था। नरेशपाल अजीतपाल का साथ दे रहे थे। इसलिए सहअभियुक्त जितेंद्र पाल के साथ मिलकर हत्या को अंजाम दिया था।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि सहअभियुक्त जितेंद्र त्यागी के बयान पर गलत तरीके से फंसाया गया है। अभियुक्त के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। स्वयं अदालत में आत्मसमर्पण किया है। पिता कई बार मंत्री रह चुके हैं और भाई विधायक है। सिर्फ बदनाम करने के लिए फंसाया गया है।