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सीवर नेटवर्क के बाद निगम अब निजी हाथों में देगा स्ट्रीट लाइटें

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सीवर नेटवर्क के बाद निगम अब निजी हाथों में देगा स्ट्रीट लाइटें
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गाजियाबाद। सीवर नेटवर्क के बाद अब नगर निगम शहर की 50 हजार से ज्यादा स्ट्रीट लाइटों को प्राइवेट हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहा है। नगर निगम इन लाइटों के वार्षिक अनुरक्षण का ठेका निजी फर्म को देगा। इसके लिए टेंडर कॉल कर लिए गए हैं। वहीं, निगम पार्षदों ने इसका विरोध किया है।
इससे पहले 2016-17 में नगर निगम व्हाइट प्लाकार्ड नाम की फर्म को शहर में नई एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाने और सात साल तक इनका मेंटेनेंस करने का ठेका दे चुका है। इस फर्म ने करीब 35 हजार सोडियम लाइटें बदलकर एलईडी लाइटें लगाई थीं। यह लाइटें सालभर बाद ही खराब होने लगीं तो विवाद बढ़ा और पार्षदों ने कांट्रेक्ट खत्म करने की मांग उठाई। इसके बाद भुगतान पाने के लिए इस फर्म ने हाईकोर्ट में केस दाखिल कर दिया। नगर निगम ने अभी तक ठेका निरस्त नहीं किया है। अब नगर निगम ने शहर की स्ट्रीट लाइटों को दूसरी प्राइवेट कंपनी के हाथों में सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्षद राजेंद्र त्यागी का कहना है कि नगर निगम से ऐसा कोई प्रस्ताव पास नहीं है कि स्ट्रीट लाइटों के वार्षिक अनुरक्षण का ठेका प्राइवेट कंपनी को दिया जाए। व्हाइट प्लाकार्ड का विवाद अभी कोर्ट में विचाराधीन है। एक काम का ठेका दो फर्मों को नहीं दिया जा सकता है।
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नगर निगम का प्रकाश विभाग शहर की स्ट्रीट लाइटों, हाईमास्ट लाइटों के मेंटेनेंस पर करीब साढ़े 5 से 6 करोड़ रुपये खर्च करता है। 2019-20 में नगर निगम के प्रकाश विभाग ने अनुरक्षण कार्य, स्टोर सामग्री खरीद पर 4.99 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा ठेके पर अनुरक्षण कार्य कराने पर 1.23 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यानी स्ट्रीट लाइटों के संचालन पर बीते साल 6.22 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह बात अलग है कि शहर की करीब 15 से 20 फीसदी लाइटें हमेशा खराब ही रहीं।
नगर निगम के सभी एसटीपी और सीवर नेटवर्क को ‘वन सिटी वन ऑपरेटर स्कीम’ के तहत करीब डेढ़ साल पहले ठेके पर दे दिया गया। सीवर नेटवर्क का मेंटेनेंस और एसटीपी का संचालन निजी कंपनी वीए टेक वाबाग कर रही है। इस फर्म ने रोबोट से सीवर लाइनों की सफाई कराने, 24 घंटे शिकायत सुनने के लिए कंट्रोल रूम बनाने का दावे किए थे, लेकिन पूरे नहीं किए। अब हालात यह है कि 40 से ज्यादा वार्डों में सीवर ओवरफ्लो की समस्या है, लेकिन पार्षदों की शिकायतों पर भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। पार्षदों के अलावा अब महापौर भी इस कंपनी से खफा है। पार्षदों को अब स्ट्रीट लाइटों को लेकर भी ऐसी ही चिंता सता रही है।
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अपर नगरायुक्त : नगर निगम को स्ट्रीट लाइटों के मेंटेनेंस पर हर साल बड़ा बजट खर्च करना पड़ता है। शहर की लाइटों को वार्षिक अनुरक्षण पर दिया जाएगा। इसके लिए टेंडर कॉल किए गए हैं। न्यूनतम दरों पर मेंटेनेंस करने का प्रस्ताव देने वाली फर्म को एएमसी दी जाएगी।
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