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पैन नंबर से खंगाली जा रही फर्जी फर्मों की कुंडली

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पैन नंबर से खंगाली जा रही फर्जी फर्मों की कुंडली
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गाजियाबाद। वाणिज्य कर विभाग का बकाया या फिर फर्जीवाड़ा कर गायब हुईं व्यावसायिक फर्मों की कुंडली पैन कार्ड नंबर से खंगाली जा रही है। विभाग के अधिकारी अब तक 70 से अधिक फर्मों का पता कर चुके हैं, जो यहां से बंद हो गईं और उसी पैन नंबर पर किसी दूसरे शहर में चल रही हैं। ऐसी फर्मों के खिलाफ जीएसटीएन निरस्त करने और वसूली की कार्रवाई विभाग कर रहा है।
जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद वैट में पंजीकृत कई फर्म अचानक से गायब हो गईं थीं। इन फर्मों पर विभाग का करोड़ों रुपया बकाया था। जीएसटी पोर्टल पर अब ऐसी फर्मों का पता लगाने के लिए पैन नंबर का इस्तेमाल किया जा रहा है। पोर्टल पर पैन नंबर डालते ही उस पर संचालित फर्मों की जानकारी विभाग को मिल रही है। कुछ फर्म दिल्ली में संचालित भी मिली हैं, जो गाजियाबाद जोन से बिना बकाया जमा करे बंद हो गईं थीं। अधिकारियों का कहना है कि इन फर्मों के बारे में दिल्ली में विभागीय अधिकारियाें को पत्र लिखा गया है, जिससे इनकी जांच की जाए। एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 यूएस दुबे ने बताया कि बकायेदारों के पुराने पैन पर जो फर्म दोबारा से खोली गई हैं, उन पर कार्रवाई करते हुए जांच और आईटीसी रोकने के लिए कहा जा रहा है।
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ई-वे बिल पर भी नजर :
माल के परिवहन के लिए ई-वे बिल जेनरेट किए जाने पर भी वाणिज्य कर विभाग की नजर है। अधिकारियों का कहना है कि एक ही ई-वे बिल पर दो बार माल का परिवहन किए जाने के मामले सामने आए हैं। ई-वे बिल की आड़ में टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।
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