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लखनऊ पहुंचा विज्ञापन ठेके का विवाद

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लखनऊ पहुंचा विज्ञापन ठेके का विवाद
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गाजियाबाद। शहर में डिजिटल होर्डिंग्स और यूनिपोल का ठेका 15 साल के लिए दिए जाने का विवाद लखनऊ पहुंच गया है। भाजपा पार्षद हिमांशु मित्तल की शिकायत पर स्थानीय निकाय निदेशालय के निदेशक ने नगर आयुक्त से जवाब मांगा है। नगरायुक्त ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है। उन्होंने भाजपा पार्षद की ओर से उठाए गए सभी सवालों का बिंदुवार जवाब दिया है। उनका कहना है कि नए सिरे से दिए गए ठेके से निगम की आमदनी बढ़ेगी।
नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर की ओर से भेजे जवाब में कहा गया है कि नगर निगम को विज्ञापन ठेके से महज चार करोड़ रुपये सालाना की आमदनी हो रही थी। नए सिरे से ठेका दिए जाने पर यह बढ़कर 14.53 करोड़ हो गई है। नगरायुक्त ने बताया है कि विज्ञापन ठेके की निविदा प्रक्रिया शुरू करने से पहले जनवरी 2021 में हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में प्रस्ताव पास किया गया था। पहली बार में निविदा में कोई फर्म नहीं आई। इसके बाद फरवरी 2021 में हुई बोर्ड बैठक में पार्षदों ने सर्वसम्मति से सहमति दी कि पूरे शहर में डिजिटल विज्ञापन न लगाए जाएं, लेकिन कुछ प्रमुख चौराहों पर डिजिटल होर्डिंग्स लगाए जाएं। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई, जिसमें पांच फर्मों ने भाग लिया।
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सबसे ज्यादा बोली लगाने वाली फर्म को विज्ञापन का ठेका दिया गया। मीडिया 24*7 नाम की फर्म ने 14.53 करोड़ की बोली लगाई। फर्म ने 10.93 करोड़ रुपये नगर निगम में जमा भी करा दिए हैं। उन्होंने शासन को बताया है कि 15000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल पर विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए इस फर्म को स्ट्रक्चर लगाने है। इसके लिए उसे 8 माह का एग्जीक्यूशन पीरियड दिया गया है। इस फर्म से दो करोड़ प्रीमियम की धनराशि भी ली गई है। नगर आयुक्त ने यह रिपोर्ट भाजपा पार्षद की शिकायत के बाद शासन की ओर से मांगी गई जानकारी के जवाब में भेजी है। नगरायुक्त का कहना है कि पूरी टेंडर प्रक्रिया नगर निगम सदन को अवगत कराकर पूरी कराई गई है। वहीं, भाजपा पार्षद हिमांशु मित्तल का कहना है निगम एक्ट में 15 साल के लिए ठेका देने का प्रावधान ही नहीं है।
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