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अस्पताल में सात हजार रुपये में किए जा रहे हर्निया और पथरी के ऑपरेशन

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अस्पताल में सात हजार रुपये में किए जा रहे हर्निया और पथरी के ऑपरेशन
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गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में सात हजार रुपये लेकर हर्निया और पथरी के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। रुपये लेने के लिए अस्पताल का स्टाफ मध्यस्थता करता है और यह भी बताता है कि इसमें से सीएमएस से लेकर सीएमओ तक हिस्सा जाता है। जो मरीज रुपये खर्च नहीं कर सकता, उसका ऑपरेशन करने के बजाय उसे दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। इस तरह की कई शिकायतें सीएमओ से भी की जाती हैं, लेकिन जांच में आरोपी निर्दोष साबित होते हैं।
घूकना निवासी रिंकू को हर्निया हो गया था। उसने जिला एमएमजी अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि ऑपरेशन करना पड़ेगा, जरूरी जांच करा लो। ओपीडी के बाहर खड़े कर्मचारी ने कहा कि सात हजार रुपये दो, सभी जांच जल्दी होने के अलावा ऑपरेशन भी दो दिन में हो जाएगा। नहीं तो 15 दिन भटकते रहोगे और ऑपरेशन भी नहीं होगा। रिंकू ने बताया कि दर्द अधिक था इसलिए कर्मचारी को सात हजार रुपये दे दिए। दो दिन में जांच होने के बाद 29 जून को ऑपरेशन हो गया। रिंकू ने बताया कि अस्पताल में ऑपरेशन के लिए जाने वाले प्रत्येक मरीज से 7 से 15 हजार रुपये तक लिए जाते हैं। जो रुपये दे देते हैं उनका ऑपरेशन हो जाता है और जो नहीं देते हैं, उन्हें कई महीनों तक भटकाया जाता है। घूकना निवासी कुंवार पाल व सिहानी निवासी धर्मीपाल का भी उसी दिन हर्निया के ऑपरेशन हुआ, उनसे भी सात-सात हजार रुपये लिए गए।
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पहले भी लग चुके हैं आरोप
एमएमजी अस्पताल प्रबंधन पर ऑपरेशन के लिए रुपये मांगने के इससे पहले भी कई बार आरोप लग चुके हैं। कई मामलों में सीएमओ से शिकायत भी हुई है, लेकिन जांच में आरोपी डॉक्टर और स्टाफ को निर्दोष बताया गया। एमएमजी अस्पताल में ही एक महिला मरीज को ऑपरेशन के लिए रुपये नहीं देने पर ऑपरेशन टेबल से उठाकर बाहर कर दिया गया था। उस मामले में खासा हंगामा भी हुआ था और तत्कालीन स्वास्थ्य राज्यमंत्री के निर्देश पर सीएमओ कार्यालय ने मामले की जांच भी की, लेकिन सभी आरोपों को फर्जी बताकर जांच पूरी कर दी गई। मामले में पीड़ित महिला या उसके परिजनों के बयान तक नहीं लिए गए। हाल ही में महिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूता और उसके परिजनों से ओटी में ही जबरन दो हजार रुपये लेने का मामला भी सामने आया था। नवजात को गंभीर बीमारी थी, जिसके बारे में डॉक्टर ने बाद में बताया और नवजात को निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया।
संयुक्त अस्पताल में भी सिजेरियन प्रसव के मामले में एक महिला डॉक्टर पर मरीज से 15 हजार रुपये लेने का आरोप लगा था। उस मामले की जांच में भी डॉक्टर को निर्दोष बताया गया था।
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शिकायत मिलने पर होगी जांच
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। 29 जून को हुए ऑपरेशन वाले मरीजों की जानकारी जुटाकर जांच की जाएगी, अगर रुपये लेने की बात सही पाई गई तो स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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