दो बजे के बाद इमरजेंसी में जांच के इंतजाम नहीं
गाजियाबाद। किसी भी दुर्घटना में घायल या बीमार को सरकारी अस्पताल में भर्ती तो कर लिया जाता है लेकिन दो बजे के बाद घायल या बीमार की जांच के इंतजाम इमरजेंसी में नहीं है। मरीज को गंभीर अवस्था में होने पर अचानक किसी तरह की जांच की जरूरत पड़ती है तो उसकी जांच दूसरे दिन ही हो पाती है। कई बार मरीज को रेफर कर दिया जाता है या निजी केंद्र पर जांच कराना पड़ता है। एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में कई महत्वपूर्ण दवाइयों की भी कमी है। इस कारण से हृदय के मरीजों को समय इलाज नहीं मिल पाता है।
दो बजे के बाद जांच बंद होना किसी एक सरकारी अस्पताल की बात नहीं है, बल्कि एमएमजी, महिला और संयुक्त अस्पताल सहित सभी सीएचसी और पीएचसी की है। स्थिति यह है कि एमएमजी और संयुक्त अस्पताल में दोपहर 12 बजे तक ही खून के नमूने लिए जाते हैं, जबकि महिला अस्पताल में जांच के लिए आने वाली महिलाओं को सुबह आठ बजे से 10 बजे के बीच लाइन में लगना पड़ता है। इस दौरान जो महिलाएं टोकन पाने में सफल हो जाती हैं, उनकी जांच हो जाती है। इसके अलावा अन्य महिलाओं को दूसरे दिन सुबह आने के लिए बोल दिया जाता है। एमएमजी और संयुक्त अस्पताल में प्रतिदिन आठ से 10 घायल और बीमार दो बजे के बाद भर्ती होते हैं। इनमें से कई ऐसे होते हैं जिनके एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांच की जरूरत तत्काल होती है लेकिन लैब और जांच रूम बंद होने से जांच नहीं हो पाती है।
रात में भी जांच करने के हैं निर्देश
चार साल पहले शासन से निर्देश जारी हुआ था कि किसी मरीज के इमरजेंसी में भर्ती होने पर जरूरत के अनुसार उसकी जांच रात में भी की जाए। शुरुआत में 10 दिन तक रात आठ बजे तक लैब और एक्स-रे रूम खुले रहते थे। इसके बाद से ही व्यवस्था बंद हो गई।
शासन को लिखा गया है पत्र
एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि शाम सात बजे तक स्टाफ मौजूद रहता है, इमरजेंसी में भर्ती जिस मरीज को जांच की जरूरत होती है, उसकी जांच की जाती है। रात में स्टाफ की कमी के कारण जांच नहीं हो पाती है। इसके लिए शासन को पत्र लिखकर स्टाफ नियुक्त करने की मांग की गई है। स्टाफ मिलने के बाद 24 घंटे जांच शुरू करा दी जाएगी। इमरजेंसी में दवाइयों की व्यवस्था पूरी रहती है, अगर कोई दवाई उपलब्ध नहीं होगी तो उसका पूरक अवश्य रहता है।