ग्रामीण वार्डों में भी शहर के बराबर गृहकर लगाया, विरोध में उतरे पार्षद
गाजियाबाद। नगर निगम जीआईएस सर्वे कराकर छूटे भवनों को संपत्ति कर के दायरे में लाया तो ग्रामीण वार्डों में भी पॉश कॉलोनियों के बराबर गृहकर लगा दिया। घर के बाहर सड़कों की चौड़ाई बराबर हुई तो सुविधाओं के लिए तरस रहे महरौली, नायफल, बयाना और गढ़ी सिकरोड़ के भवन मालिकों को भी राजनगर-कविनगर के बराबर गृहकर देना होगा। नगर निगम ने 25 से ज्यादा ग्रामीण परिवेश वाले वार्डों में भी गृहकर के बिल भेजने शुरू कर दिए हैं। शहरी वार्डों के बराबर कर लगाने पर पार्षदों ने विरोध शुरू कर दिया है।
दरअसल, जिले के करीब 40 गांव 1994 में नगर निगम के गठन के वक्त निगम सीमा में शामिल तो कर लिए गए थे, लेकिन शहरों वाली सुविधा उन्हें अभी तक न मिली। इसी वजह से निगम अधिकारी 27 साल में इन गांवों के भवनों से कर वसूली नहीं कर पाए। अब शासन ने नगर निगम की आमदनी बढ़ाने के लिए जीआईएस सर्वे कराया तो इन ग्रामीण परिवेश के वार्डों में आने वाले भवनों को भी गृहकर के दायरे में लाया गया है। नगर निगम ने कर वसूली के लिए इन भवन मालिकों को बिल भेजने शुरू कर दिए हैं। पहली ही बार में इन भवनों पर इतना ज्यादा गृहकर लगा दिया गया है कि स्थानीय लोगों ने पार्षदों के समक्ष आपत्ति जताई है। चुनावी साल में गांवों में भी महंगा कर लगा दिए जाने से पार्षदों ने विरोध किया है।
इसलिए है विरोध
शहरों में मकानों का साइज छोटा है, लेकिन गांवों में अभी भी एक-एक हजार गज से ज्यादा के मकान बने हुए हैं। गांवों के लोगों ने पांच-पांच बीघा में अपने घेर बना रखे हैं। ऐसे में जल निकासी, सड़क, सीवर, पानी, स्ट्रीट लाइट, पार्कों की सुविधा के लिए तरस रहे इन गांवों में गृहकर की दर शहर के बराबर रखी गई तो शहर से कई गुना कर इन भवन मालिकों को देना होगा। पार्षदों का कहना है कि यह जायज नहीं है।
गृहकर की अधिकतम वर्तमान दरें
12 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर बने मकानों के लिए --- 87 पैसे प्रति वर्ग फुट
12 से 24 मीटर चौड़ी सड़क पर बने मकानों के लिए --- 1.10 रुपये प्रति वर्ग फुट
24 मीटर से ज्यादा चौड़ी सड़क पर बने मकानों के लिए --- 1.14 रुपये प्रति वर्ग फुट
गांव में सुविधाएं हैं कम
ग्रामीण वार्डों में सुविधाएं शहरों के समान नहीं है। ऐसी स्थिति में गांवों में शहरों के बराबर कर नहीं लगाया जाना चाहिए। हमने यह मामला नगर निगम बोर्ड बैठक में भी उठाया है। गांवों से अभी तक निगम को कर नहीं मिल रहा है। दरें कम होंगी तो लोगों को कर देने की शुरूआत करने में दिक्कत नहीं होगी। ज्यादा कर लगाने से मामला विवादों में फंस सकता है।
- राजेंद्र त्यागी, निगम पार्षद
वसूली होगी मुश्किल
नगर निगम अधिकारी कर बढ़ाने के लिए ऐसे निर्णय ले रहे हैं, जिससे लोग परेशान हैं। ग्रामीण वार्डों पर शहरों के बराबर कर लगाया गया तो वसूली करना मुश्किल हो जाएगा। इसी वजह से नगर निगम अधिकारी 27 साल में अभी तक कर की वसूली नहीं कर पाए। ग्रामीण और शहरी वार्डों में अंतर होना चाहिए। - राजीव शर्मा, निगम पार्षद
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अधिकारी बोले
फिलहाल नगर निगम में ऐसा नियम नहीं है कि गांव और शहरी वार्डों को अलग-अलग वर्ग में बांटा जा सके। इसके लिए सर्किल रेट के आधार पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव बनाया गया है, यह अभी निगम सदन से पास नहीं हुआ है। इसके लागू होने से यह दिक्कत दूर हो जाएगी। - महेंद्र सिंह तंवर, नगरायुक्त