रेल ट्रैक के ऊपर बना लिए मकान, रेलवे ने खाली कराने को चस्पा किए नोटिस
गाजियाबाद। पुराना रेलवे स्टेशन से मेरठ होकर पंजाब व पाकिस्तान जाने वाली पुरानी रेल लाइन पर अब कब्जे हो गए हैं। करीब 40-50 साल पहले रेलवे ट्रैक के ऊपर ही लोगों ने मकान, स्कूल, दुकानें बना ली हैं। अब 50 साल बाद रेलवे अधिकारियों को अपनी इस जमीन की याद आई है, उन्होंने रेलवे की संपत्ति पर बने मकानों, स्कूल व अन्य भवनों पर नोटिस चस्पा कर जवाब तलब किया है। भवन मालिकों को अब दस्तावेज के साथ दो अप्रैल को एडीईएन कार्यालय में जाकर नोटिस का जवाब देना होगा। रेलवे अधिकारी बुलडोजर चलाकर अपनी इस जमीन को खाली कराने की तैयारी कर रहे हैं।
दरअसल, आजादी से पहले दिल्ली से पाकिस्तान जाने वाली ट्रेनें गाजियाबाद होकर जाती थीं। यह ट्रेनें पहले गाजियाबाद आती थी, यहां इंजन बदलकर मेरठ के रास्ते पंजाब और फिर पाकिस्तान तक जाती थीं। गाजियाबाद में पुराना रेलवे स्टेशन से कैला भट्ठा, मुकुंदनगर, लोहिया नगर होते मेरठ तक ट्रेन जाती थी, बाद में नई लाइन डाली गई तो पुरानी लाइन वाले क्षेत्र में रेलवे की जमीन पर कब्जे हो गए। रेलवे ने अब गोशाला फाटक के आसपास भवनों के सरकारी जमीन पर बने होने का दावा कर उन्हें नोटिस जारी किए हैं। दो दिन पहले टीम ने यहां नक्शा लेकर निरीक्षण किया था। रेलवे की ओर से मकानों पर चस्पा किए गए नोटिस में कब्जा की गई जमीन का क्षेत्रफल भी दर्ज किया गया है। रेलवे के असिस्टेंट डिविजन इंजीनियर (एडीईएन) की ओर से जारी किए इस नोटिस का जवाब दो अप्रैल तक मांगा गया है। एडीईएन ने दो अप्रैल को भवन मालिक को सुबह 10 बजे अपने ऑफिस में तलब किया है। कार्यालय में न जाने पर रेलवे की ओर से एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
बोले लोग
स्थानीय निवासी राजेंद्र ने कहा कि करीब 40 साल से यहां रह रहे हैं। मकान की रजिस्ट्री के कागजात भी हैं। इससे पहले रेलवे ने कभी इस जमीन को अपना नहीं बताया, अब लोगों को बेघर करने की साजिश कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी जमशेद ने कहा कि रेलवे की जमीन अलग है, लेकिन अब पूरी जमीन को अपनी बता अधिकारी अपनी बता रहे हैं। अधिकारी लोगों को मकान देने की बजाय उन्हें बेघर करने की कोशिश कर रहे हैं। इसका विरोध करेंगे।
क्षेत्रीय पार्षद जाकिर सैफी ने कहा कि क्षेत्र में करीब 100 से ज्यादा भवनों, स्कूल, दुकानों पर रेलवे अधिकारियों ने नोटिस चस्पा किए हैं। सोमवार को स्थानीय लोगों के साथ रेलवे के अधिकारियों से मिलेंगे, अपना पक्ष रखेंगे।