10 साल में एक लाख सबमर्सिबल लगे, हर साल तीन मीटर नीचे खिसक रहा पानी
गाजियाबाद। डार्क जोन में शामिल गाजियाबाद क्षेत्र में भूजल का अंधाधुंध दोहन अभी भी थम नहीं रहा। बीते 10 साल में नगर निगम सीमा क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा निजी सबमर्सिबल लगे हैं। इसी का असर है कि हर साल शहर में भूजल का स्तर औसतन तीन मीटर (10 फुट) नीचे खिसक रहा है। इसके बावजूद तालाबों पर कब्जे हो रहे हैं और जल संचयन प्रणाली सिर्फ फाइलों में विकसित की जा रही है। भूजल का यूं बेजा दोहन बंद नहीं किया गया तो पीने के लिए भी पानी नहीं बचेगा।
भूगर्भ जल विभाग ने नीचे खिसकते पानी के स्तर की निगरानी के लिए शहर में 39 स्थानों पर पीजोमीटर लगाए हुए हैं। हर साल मानसून से पहले और बारिश का सीजन खत्म होने के बाद भूजल स्तर की रीडिंग ली जा रही है। विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 2016 से 2020 के दरमियान नूरनगर, राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में पानी का स्तर सबसे ज्यादा करीब 19 मीटर नीचे खिसका है। साल 2016 में क्षेत्र में भूजल का स्तर 29.43 मीटर पर था और साल 2020 में 48.31 मीटर पर पहुंच गया था। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रुप हाउसिंग और कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। इसके बाद के आंकड़े अभी केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की ओर से जारी नहीं किए गए हैं। साहिबाबाद गांव क्षेत्र में जल स्तर 9.4 मीटर और अर्थला क्षेत्र में 9.22 मीटर नीचे खिसक गया है। इन दोनों ही क्षेत्र में बड़ी संख्या में उद्योग और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हैं और भूजल का धड़ल्ले से दोहन किया जा रहा है।
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तालाबों ने थामा गिरता जल स्तर
नगर निगम सीमा क्षेत्र की उन कॉलोनियों में भूजल स्तर में गिरावट कम आई है, जिनमें तालाब हैं। दुहाई, सदरपुर, महरौली, शाहपुर बम्हेटा आदि क्षेत्रों में भूजल स्तर में औसतन सालाना गिरावट करीब 0.5 से लेकर 0.75 मीटर तक की गिरावट दर्ज की जा रही है। औद्योगिक या सघन आबादी वाले क्षेत्रों में 2.5 से 3 मीटर सालाना की गिरावट है।
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100 से ज्यादा तालाबों पर खड़ी हो गईं इमारतें
पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए काम करने वाले कड़कड़ मॉडल निवासी सुशील राघव का कहना है कि प्राकृतिक रूप से भूजल स्तर बढ़ाने वाले तालाबों को पाटकर उन पर कब्जे किए जा रहे हैं। नगर निगम सीमा क्षेत्र में 140 तालाब थे, इनमें से 108 पर कब्जे हो चुके हैं। पूर्व में एनजीटी ने यूपी के मुख्य सचिव को प्रदेश भर के तालाबों को खाली कराकर उनका जीर्णोद्धार करने के आदेश दिए थे, लेकिन काम नहीं हुआ।
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स्थान 2016 2017 2018 2019 2020
नूरनगर 29.43 30.72 35.12 44.00 48.31
विजयनगर 34.92 37.02 39.11 41.05 44.88
वैशाली 30.27 30.48 33.45 34.12 35.12
महाराजपुर 28.69 31.52 30.39 31.47 32.36
शास्त्री नगर 25.28 26.41 27.45 28.38 28.77
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फोटो
20 तालाबों को जिंदा कर चुके नगरायुक्त और पोंडमैन रामवीर तंवर
- शहर के 12 तालाबों को बरसात से पहले किया जाएगा साफ
- प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में गाजियाबाद की सराहना की
गाजियाबाद। नगर निगम ने बीते एक साल से तालाबों को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है। नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर और पोंड मैन के नाम से मशहूर जल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले रामवीर तंवर इस एक साल में शहर के 20 तालाबों को जिंदा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साल ‘मन की बात’ कार्यक्रम में गाजियाबाद में तालाब सफाई अभियान और पोंडमैन रामवीर तंवर की सराहना की थी। जल शक्ति मंत्रालय ने भी नगर निगम के इस अभियान की सराहना की है।
अतिक्रमण मुक्त कराकर इन तालाबों की न केवल सफाई कराई गई, बल्कि बरसात का पानी इन तक पहुंचने का रास्ता भी बनाया गया। एक साल पहले गंदगी से अटे इन तालाबों में अब मछलियां अठखेलियां करतीं नजर आती हैं। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि जल संरक्षण में उनकी व्यक्तिगत रुचि है। एक साल पहले उन्होंने शहर के तालाबों का सर्वे कराया तो पता चला कि 32 तालाब अभी ऐसे हैं जिन्हें पुनर्जीवित कर गिरते भूजल स्तर को रोकने में मदद ली जा सकती है। उन्होंने एनजीओ संचालक रामवीर तंवर के साथ मिलकर वर्ष 2021 बरसात के सीजन से पहले तालाबों की सफाई का काम शुरू कराया। अब तक वह 20 तालाबों को साफ कराकर उन्हें नया जीवन दे चुके हैं। नगरायुक्त का कहना है कि अभी 12 तालाब और ऐसे हैं जिन पर अब 2022 में सफाई कराकर पुनर्जीवित किया जाएगा।
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वाटर रिचार्ज के साथ 12 तालाबों से आमदनी भी हुई शुरू
साफ कराए जा चुके 20 में से 12 तालाबों को नगर निगम ने पहली बार मछली पालन के लिए पट्टे पर दिया है। मत्स्य पालन विभाग के माध्यम से इन तालाबों को दिया गया है। नगरायुक्त का कहना है कि इससे न केवल नगर निगम को आमदनी होगी, बल्कि इन तालाबों का मेंटेनेंस और निरंतर साफ-सफाई भी बनी रहेगी।