प्रसव के दौरान बच्चा बदलने का आरोप, डीएनए जांच की मांग
गाजियाबाद। दिल्ली निवासी प्रसूता ने निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान बच्चा बदलने का आरोप लगा डीएनए जांच की मांग सीएमओ से की है। मामले की शिकायत पुलिस से की गई। पुलिस ने शिकायत सीएमओ के पास भेज दी है। पीड़िता ने शिकायती पत्र में बताया कि प्रसव के दौरान घर के सदस्यों से पूछा था कि पहला बच्चा क्या है? प्रसव के चार घंटे बाद बताया कि बेटी पैदा हुई है। महिला को पहला बच्चा बेटा है।
दिल्ली के गोकुलपुरी निवासी जूली चौहान ने सीएमओ को दिए पत्र में बताया है कि 12 फ रवरी को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर दिल्ली के स्वामी दयानंद अस्पताल में ले गए। वहां पर डॉक्टर ने कहा कि अभी प्रसव होने में कई दिन का समय है और वापस भेज दिया। हालत ज्यादा खराब होने पर परिजन उसे शालीमार गार्डन स्थित निजी नर्सिंग होम में ले गए। वहां पर महिला डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि कुछ देर में प्रसव हो सकता है और उसे भर्ती कर लिया। आरोप है कि महिला ने सामान्य प्रसव से बच्चे को जन्म दिया लेकिन 14 टांके भी लगाए गए। प्रसव के बाद नर्स बच्चे को उसे दिखाए बिना कहीं ले गई। कुछ देर बाद नर्स ने आकर पूछा कि उसका पहला बच्चा बेटी है या बेटा। जूली ने बताया कि बेटा है तो नर्स ने कहा कि फि र ठीक है अब तुम्हें बेटी हुई है। चार घंटे बाद उसे बेटी सौंपी गई।
अस्पताल प्रबंधन ने उसकी बिगड़ती तबीयत को नजरअंदाज करके अगले दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी। पांच दिन बाद जब वह दोबारा अस्पताल में जांच कराने गई तो बच्चा बदलने के बारे में डॉक्टर से बात की, इस पर महिला डॉक्टर भड़क गई और चोरी का आरोप लगाकर जेल भिजवाने की धमकी दी। पीड़िता ने मामले में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जांच करने और उसे सौंपी गई बच्ची का डीएनए टेस्ट कराने की मांग साहिबाबाद थाने में की है।
शिकायत के बाद भी नहीं हो रही कोई कार्रवाई
जूली के पति पप्पू चौहान का कहना है कि मामले की शिकायत साहिबाबाद थाने में की थी। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब जल्द ही डीएम और सीएमओ से भी मिलकर शिकायत करूंगा।
कराई जाएगी बच्चे की डीएनए जांच
एसीएमओ डॉॅ. सुनील त्यागी ने बताया कि शिकायती पत्र मिला है। जांच की जा रही है। पहले पीड़िता और अस्पताल प्रबंधन के बयान दर्ज कराए जाएंगे, इसके बाद अगर जरूरत पड़ी तो बच्ची की डीएनए जांच कराई जाएगी।
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