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एक जनवरी से बंद हो सकती है इमरजेंसी

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एक जनवरी से बंद हो सकती है इमरजेंसी
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गाजियाबाद। स्वास्थ्य राज्यमंत्री के गृह जनपद में दस लाख की आबादी के इलाज के लिए 13 साल पहले बनाए गए संयुक्त अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण इमरजेंसी सेवा एक जनवरी से बंद हो सकती है। अस्पताल में एक साल पहले प्रतिदिन 12 सौ से 1500 मरीज आते थे। अब 500 से 700 रह गई है।
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं के महानिदेशक को पत्र लिखकर कहा है कि ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) के छह पद खाली होने से इमरजेंसी संचालित करना मुश्किल हो रहा है। तीन ईएमओ जल्द नियुक्त किए जाएं नहीं तो इमरजेंसी सेवा पूरी तरह से ठप होने की संभावना है। पत्र में यह भी कहा गया है कि कई बार महानिदेशालय को पत्र लिखा जा चुका है, इसके बावजूद स्थिति जस की तस है।
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एक जनवरी से ईएमओ अवकाश पर
संयुक्त अस्पताल की इमरजेंसी में कार्यरत एक मात्र ईएमओ के परिवार में शादी समारोह होने से एक जनवरी से 15 दिन के लिए अवकाश पर जा रहे हैं। उनके जाने के बाद इमरजेंसी में ड्यूटी करने वाला कोई नहीं रहेगा। अभी भी कई बार स्थिति ऐसी होती है कि जो डॉक्टर ओपीडी में मरीजों का इलाज कर रहे हैं, वही किसी गंभीर मरीज के आने पर इमरजेंसी में पहुंच जाते हैं। इससे दोनों तरफ परेशानी होती है और डॉक्टर भी घड़ी के दोलन की तरह इधर से उधर भागते रहते हैं।
2008 में दस लाख की आबादी पर बना था अस्पताल
संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल 2008 में बनकर तैयार हुआ था। शासन का उद्देश्य था कि अस्पताल के पांच किमी की परिधि में दस लाख की आबादी को बेहतर इलाज मिल सके। अस्पताल बनने के छह साल बाद 70 फीसदी स्टाफ हो गया था। उसके बाद कई डॉक्टर सेवानिवृत्त हो गए तो कई का ट्रांसफर हो गया। अब स्थिति यह है कि कई बार ओपीडी में बैठे डॉक्टर कभी इमरजेंसी तो कभी ओपीडी में बैठकर मरीजों का इलाज करते हैं।
चार थाने व तीन सीएचसी पीएचसी का होता है मेडिकल
अस्पताल की इमरजेंसी में इंदिरापुरम, मधुबन बापूधाम, कौशांबी और कविनगर थाने के सभी मेडिको लीगल मामले संयुक्त अस्पताल में किए जाते हैं। इसके अलावा मुरादनगर, मोदीनगर सीएचसी और भोजपुर के रेफरल मेडिकोलीगल मामले अस्पताल में किए जाते हैं। अगर अस्पताल में इमरजेंसी बंद हो गई तो यहां पर मेडिका ेलीगल की भी परेशानी होगी।
वीवीआईपी ड्यूटी के समय पर होती है अधिक परेशानी
दिल्ली या गाजियाबाद में किसी भी वीआईपी के आगमन पर अस्पताल से हर महीने 11 से 20 के बीच डॉक्टरों की वीआईपी ड्यूटी लगाई जाती है। इसमें एक फिजिशियन, एक सर्जन और बेहोशी वाले डॉक्टर ड्यूटी में जाते हैं। उस दौरान ओपीडी में इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों को अधिक परेशानी होती है।
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हर दो महीने के बाद शासन को पत्र लिखा जा रहा है। इसके बावजूद डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हो रही है। स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखकर बताया गया है कि तीन ईएमओ की नियुक्ति की जाए, नहीं तो इमरजेंसी सेवा बंद होने की संभावना है।
डॉ. संजय तेवतिया, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक संयुक्त अस्पताल
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यह है अस्पताल में स्टाफ की स्थिति
विशेषज्ञ - पद - कार्यरत - रिक्त
सर्जन - 04 - 00 - 04
फिजिशियन - 02 - 00 -02
ईएमओ - 07 - 01 - 06
कार्डियोलॉजिस्ट - 01-00 - 01
आथ्रोपैडिक सर्जन - 03 - 01 - 02
त्वचा रोग विशेषज्ञ - 01 - 00- 01
चेस्ट फिजिशियन - 01- 00 - 01
महिला विंग के लिए
लेडी मेडिकल ऑफिसर - 04- 01 - 03
महिला रोग विशेषज्ञ - 03 - 01 - 02
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