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मधुमेह और मानसिक रोग की दवा खत्म, मरीजों को मिल रही आश्वासन की गोली

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मधुमेह और मानसिक रोग की दवा खत्म, मरीजों को मिल रही आश्वासन की गोली
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गाजियाबाद। एमएमजी जिला अस्पताल में मधुमेह और मानसिक रोग की दवा खत्म हो चुकी है। मरीज डॉक्टरों से दवा के बारे में पूछ रहे हैं तो उन्होंने सिर्फ यह आश्वासन मिल रहा है कि थोड़े दिन में आ जाएगी, लेकिन समस्या सिर्फ दो मर्ज की दवा खत्म हो जाने की नहीं है। थायराइड समेत सभी हार्मोंस की जांच भी एक महीने से नहीं हो रही है। जांच के लिए रसायन की जरूरत है और इसे खरीदने के लिए बजट नहीं है। ऐसे में मरीज बाहर से जांच कराने और दवा खरीदने पर मजबूर हैं। इसमें जेब साफ हो रही है।
दवा के लिए मरीजों के पास दो विकल्प हैं। या तो जन औषधि केंद्र से लें या फिर अन्य निजी मेडिकल स्टोर से। जन औषधि केंद्र पर जेनेरिक दवाएं सस्ती हैं, लेकिन यहां सभी उपलब्ध नहीं है। अन्य मेडिकल स्टोर पर दवाइयां काफी महंगी हैं। जांच के लिए सस्ता वाला कोई विकल्प नहीं है। हार्मोंस की जांच पर लोगों के 1000 से 1200 रुपये एक बार में खर्च हो रहे हैं। एमएमजी में रोजाना 500 मरीजों के खून की जांच होती है, इनमें 200 को हार्मोनल जांच की जरूरत होती है। महिला अस्पताल से लगभग 200 मरीज हार्मोनल जांच के लिए आते हैं। इसमें थायराइड, विटामिन डी, बी-12 की जांच निशुल्क की जाती है। निजी लैब में यह तीनों जांच 1200 रुपये से 1500 रुपये में होती है। अस्पताल में जांच के लिए प्रति महीने दो से सवा दो लाख रुपये केमिकल्स पर खर्च होता है।
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अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी का कहना है कि बजट जारी हो चुका है, जल्द ही जांच शुरू हो जाएगी। दवाइयों की कमी जल्द दूर होगी। फिलहाल जो दवा नहीं है, उनके विकल्प के रूप में अन्य दवा दी जा रही हैं या फिर मरीजों को जन औषधि केंद्र पर भेजा जा रहा है।
संयुक्त अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे जांच बंद
संयुक्त अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे होने के बावजूद लोगों की जांच नहीं हो रही है। डिजिटल के लिए प्रशिक्षित टेकनीशियन को टीबी अस्पताल से संबद्ध कर दिया गया है। इसके अलावा डिजिटल की एक्स-रे फिल्म भी नहीं मिल रही है। सीएमएस डॉ. विनोद चंद्र पांडेय का कहना है कि सामान्य एक्स-रे किया जा रहा है। फिल्म की आपूर्ति के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
10 महीने से महिला अस्पताल में नहीं हैं रेडियोलॉजिस्ट
महिला अस्पताल में 10 महीने पहले रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक कुमार का ट्रांसफर हो गया था, उसके बाद से अब तक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हो पाई है। सीएमओ ने एमएमजी अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पंकज को महिला अस्पताल से संबद्ध किया है, लेकिन मेडिकोलीगल, इमरजेंसी और पोस्टमार्टम में आए दिन ड्यूटी लगने से वह महिला अस्पताल में समय नहीं दे पाते हैं। इस कारण से गर्भवती को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए निजी केंद्रों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. संगीता गोयल का कहना है कि स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
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खांसी का सिरप भी नहीं
एमएमजी में खांसी का सिरप खत्म हो चुका है। डॉक्टर इसके बदले गोलियां दे रहे हैं। पेट के कीड़े मारने की दवा एलबेंडाजोल भी खत्म है। यह बाजार में 35 से 40 रुपये की एक गोली और जन औषधि केंद्र पर सात रुपये की है। मधुमेह की दवा मेटफार्मिन बाजार में 200 रुपये की और जन औषधि केंद्र पर 18 रुपये की है। मानसिक रोग से संबंधित दवा क्लांजीपाम बाजार में 35 से 50 रुपये का दस गोली का पत्ता और जन औषधि केंद्र पर 16 रुपये का है।
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