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मुआवजा घोटाला : तीन दिन में सब रजिस्ट्रार का नाम नहीं मालूम कर सकी पुलिस

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मुआवजा घोटाला : तीन दिन में सब रजिस्ट्रार का नाम नहीं मालूम कर सकी पुलिस
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गाजियाबाद। 22 करोड़ के मुआवजा घोटाले में तीन एफआईआर दर्ज हो जाने के बाद पुलिस जांच में हीलाहवाली कर रही है। तीन दिन में इतना तक मालूम नहीं चल पाया कि वह सब रजिस्ट्रार कौन है जिसके खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। एफआईआर में अपर जिलाधिकारी भूमि अध्यापित कार्यालय के कर्मचारी भी आरोपी हैं लेकिन इनका नाम नहीं खोला गया है। इनकी भी अब तक पहचान नहीं हो पाई है। दो नामजद आरोपी स्पेशल टास्क फोर्स ने गिरफ्तार किए। पुलिस ने कोई गिरफ्तारी भी नहीं की है।
सिहानी गेट थाना में दर्ज एफआईआर में बताया गया है कि एडीएम एलए के कार्यालय में घोटाले के समय तैनात रहे राजस्व कर्मी, सब रजिस्ट्रार और एडीएम भूमि अध्यापित के कार्यालय की भूमिका संदिग्ध है। इन लोगों ने बगैर सत्यापन किए मुआवजे में 22 करोड़ बांट दिए। मास्टरमाइंड बिल्डर गोल्डी ने फर्जी समिति बनाकर मुआवजा हड़पा। अफसरों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी समिति का सत्यापन करने की थी लेकिन यह नहीं किया गया। बैनामे पर रोक के बावजूद बैनामे किए गए और अफसरों ने इसे नहीं देखा।
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यह इस तरह का दूसरा घोटाला है। इससे पहले 25 करोड़ का घोटाला सामने आ चुका है। उसमें तत्कालीन एडीएम की भूमिका सामने आई थी। उस समय डीएम के पद पर तैनात रहे विमल कुमार और निधि केसरवानी के खिलाफ सीएम योगी आदित्यनाथ ने कार्रवाई की लेकिन गाजियाबाद का पुलिस-प्रशासन 22 करोड़ के घोटाले के आरोपी अफसरों और कर्मचारियों का नाम तक तीन दिन में उजागर नहीं कर पाया है। इससे पता चलता है कि कार्रवाई कितनी गंभीरता से चल रही है। एफआईआर में अरुण कुमार, उसका बेटा गोल्डी निवासी सफदरजंग दिल्ली, किसमिश निवासी कल्लूगढ़ी डासना, सुधाकर मिश्रा और फतेह मोहम्मद नामजद हैं। अब तक गोल्डी और सुधाकर की गिरफ्तारी हुई है। सुधाकर तत्कालीन एडीएम का रिश्तेदार बताया गया है।
समिति के सदस्यों से पूछताछ नहीं
जिस फर्जी समिति के नाम से मुआवजा लिया गया, उसमें मधुसूदन गुप्ता, शांति देवी, सत्या देवी, निर्मला देवी, दीपचंद, लाजवंती, ज्ञानचंद, श्रवण कुमार, धर्मपाल, कुसुम, शशि गुप्ता, प्रदीप गुप्ता, अरुण कुमार, सत्यपाल, रविंद्र कुमार और विपिन कुमार शामिल हैं। इनमें से सत्या देवी की मौत हो चुकी है। अन्य सदस्यों में से अब तक किसी से पूछताछ तक नहीं की गई है।
रिमांड पर नहीं लिए आरोपी
जेल भेजे गए आरोपी गोल्डी और सुधाकर से न एसटीएफ ने पूछताछ की और न ही सिहानी गेट थाना पुलिस ने। अफसरों ने कहा कि इन्हें रिमांड पर लिया जाएगा लेकिन इनके जेल जाने के तीन दिन के बाद भी रिमांड के लिए कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। इनसे पूछताछ में ही पता चलेगा कि घोटाला कैसे हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल रहे।
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सूची मांगी है
सीओ आलोक दुबे का कहना है कि मामले में रजिस्ट्रार व अन्य तत्कालीन लोगों के नामों की सूची प्रशासन से मांगी गई है। जांच की जा रही है। जल्द ही अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
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