500 लोगों से की 4 करोड़ की साइबर ठगी, 3 आरोपी गिरफ्तार
गाजियाबाद। फर्जी आधार कार्ड बनाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह ने 500 लोगों से 4 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोपी केमिकल और फार्मा क्षेत्र से जुड़े लोगों को निशाना बनाते हुए कमीशन के आधार पर उनका माल ज्यादा मुनाफे में बेचने का झांसा देते थे। मधुबन बापूधाम और इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में साइबर ठगी के मामले दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच कर इस गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर करीब 15 बैंक खातों को सीज कर दिया है। आरोपियों से 12 चेक, 3 पैन कार्ड, 3 आधार कार्ड, 18 एटीएम कार्ड, 4 मोबाइल फोन और 1 मोहर बरामद हुई है।
जनवरी 2021 में इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में ज्योति ट्रेडर्स के मालिक ने साइबर ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। ठगों ने अधिक मुनाफे का लालच देकर उनसे साढ़े 8 लाख रुपये ठग लिए थे। मधुबन बापूधाम के संदीप गुप्ता को मोटे मुनाफे पर केमिकल बेचने का झांसा देते हुए 23 लाख की ठगी की थी। इसके अलावा ठगों ने तमिलनाडु निवासी जैफ्री जॉर्ज से भी 10 लाख की ठगी की थी। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों व सरगना की तलाश की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों में रायबरेली निवासी रुपचंद, त्रिलोकपुरी निवासी नवीन कुमार और लाजपत नगर निवासी सुरेंद्र सिंह हैं। इनमें से रुपचंद वैशाली सेक्टर-4 स्थित एक बैंक में ऑपरेटर था और आधार कार्ड बनाने का काम करता था। नवीन उसका सहयोगी था। सुरेंद्र ने 10 हजार रुपये देकर पहले अपने दो फर्जी आधार कार्ड बनवाए। इसके बाद रूपचंद ने सुरेंद्र के कहने पर बैंक में आने वाले लोगों के दस्तावेज के आधार पर फर्जी आधार कार्ड बनाना शुरू कर दिया। इन आधार कार्ड के जरिये विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाये जाते थे। ठगी की रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर होती थी। गिरोह के सभी सदस्यों का काम के हिसाब से कमीशन तय था।
ऐसे देते थे ठगी को अंजाम
गिरोह का एक सदस्य केमिकल और फार्मा से जुड़े लोगों की डिटेल निकालकर सारी जानकारी उपलब्ध कराता था। एक सदस्य खुद को विदेश में किसी फार्मा कंपनी में कार्यरत बताकर एक विशेष प्रकार के केमिकल के व्यापार में 50 प्रतिशत का मुनाफा दिलाने का लालच देता था। पीड़ित को जिस व्यक्ति से केमिकल खरीदकर उसे बेचने के लिए कहा जाता था, वह भी गिरोह का सदस्य होता था। पीड़ित के राजी होने पर एक सदस्य को नमूना लेने के लिए भारत भेजा जाता था। नमूने की जांच के बाद छोटा ऑर्डर लेकर उसका भुगतान किया जाता था। जिसके बाद बड़ा ऑर्डर लेकर पैसे खाते में ट्रांसफर करा कर गायब हो जाते थे।