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ब्लैक फंगस के इलाज की नहीं व्यवस्था, मेरठ या ग्रेटर नोएडा रेफर होंगे मरीज

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ब्लैक फंगस के इलाज की नहीं व्यवस्था, मेरठ या ग्रेटर नोएडा रेफर होंगे मरीज
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गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण कम हुआ तो म्यूकोर माइकोसिस (ब्लैक फंगस) की नई चुनौती सामने आ गई है। अब स्वास्थ्य विभाग ने भी मान लिया है कि जिले में 44 मरीज मिल चुके हैं। हालांकि इस समय जिले में 55 मरीजों का इलाज चल रहा है। विभाग इस बात को भी मान रहा है कि जिले में अभी इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। अगर संक्रमित आते हैं तो उन्हें मेरठ के एलआर मेडिकल कालेज या जिम्स ग्रेटर नोएडा रेफर किया जाएगा। अगर प्राइवेट में भर्ती किसी मरीज को दवाई या इंजेक्शन की जरूरत होगी तो उसे मेरठ ही जाना पड़ेगा या दिल्ली से दवाई लानी होगी।
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डायबिटीज और कमजोर इम्युनिटी वालों के लिए घातक
ईएनटी सर्जन डॉ नवनीत वर्मा का कहना है कि ब्लैक फंगस उन लोगों को लिए घातक है, जो कोरोना से हाल-फिलहाल में उबरे हैं। कोविड संक्रमित वह मरीज जिसका पिछले छह सप्ताह से उपचार चल रहा हो। अनियंत्रित मधुमेह, एचआईवी, एड्स या प्राथमिक इम्युनोडेफिशिएंसी स्टेटस की समस्या हो तो इस बीमारी की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा स्टेरॉयड द्वारा इम्यूनोसप्रेशन का उपयोग (किसी भी खुराक का उपयोग तीन सप्ताह या उच्च खुराक एक सप्ताह के लिए), अंग प्रत्यारोपण के साथ इस्तेमाल की जाने वाली चिकित्सा में भी इस संक्रमण के बढ़ने का खतरा बन जाता है। लंबे समय तक न्यूट्रोपेनिया (खून संबंधित बीमारी), ट्रॉमा, बर्न, ड्रग एब्यूजर्स, लंबे समय तक आईसीयू में रहना, ट्रांसप्लांट, वोरिकोनाजोल थैरेपी (नसों का इलाज), आयरन ओवरलोडिंग थैरेपी, दूषित चिपकने वाली धूल, लकड़ी का बुरादा, भवन निर्माण आदि के संपर्क में आने पर भी यह संक्रमण फैल सकता है।
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