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व्हाइट फंगस के आठ मरीज मिले

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व्हाइट फंगस के आठ मरीज मिले
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गाजियाबाद। कोरोना महामारी के बीच ब्लैक फंगस के बारे में लोग जान भी नहीं पाए थे कि अब व्हाइट फंगस का कहर भी शुरू हो गया है। एक ही अस्पताल में आठ मरीजों का इलाज चल रहा है। इन सभी मरीजों में पहले ब्लैक फंगस पाया गया था, इलाज शुरू होने के बाद व्हाइट फंगस की जांच के लिए टिशु लैब में भेजे गए थे। शनिवार को छह मरीजों की जांच रिपोर्ट आई है। एक मरीज में पहले ही पुष्टि हुई थी, मरीज का इलाज घर से चल रहा है। छह मरीजों की उम्र 35 से 52 हैं, जबकि एक मरीज की उम्र 72 साल है। भर्ती मरीजों में एक डाक्टर भी संक्रमित हैं। सभी मरीज पहले से डायबिटीज की चपेट में हैं। इलाज करने वाले डॉ बीपी त्यागी ने बताया कि इस बीमारी को एसपरजिलोसिस (कैंडिडा) भी कहते हैं। यह बीमारी म्यूकॉरमाइसाइट्स नामक फफूंद से होती है।
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हर अंग को प्रभावित करती है बीमारी
यह खून के जरिए शरीर के लगभग हर अंग के प्रभावित करता है। यह नाखून, स्किन, पेट, किडनी, ब्रेन, मुंह के साथ फेफड़े, प्राइवेट पार्ट आंख, गला, आंत, लीवर, जीभ आदि पर हमला करता है। अंग के सेल को तेजी से नष्ट कर देता है। जिससे अंग काम करना बंद कर देता है। फंगस का अटैक इतना तेज होता है कि जब तक मरीज कुछ समझते फंगस शरीर के महत्वपूर्ण अंग को बर्बाद कर चुका होता है। इस स्थिति में अगर मरीज कोरोना को मात दे भी देता है तो शरीर के अन्य अंग के फेल होने पर मौत हो जाती है।इस बीमारी से संक्रमित शख्स का कोरोना वायरस से संक्रमित होना जरूरी नहीं है।
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