भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) नेता राकेश टिकैत ने मंगलवार को कहा कि वायु प्रदूषण के लिए किसान या पराली जलने को जिम्मेदार नहीं मानना चाहिए। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बयान का हवाला दिया।
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने प्रदूषण के लिए किसानों को जिम्मेदार बताने वाले लोगों से माफी मांगने की भी मांग की।
टिकैत ने हिंदी में ट्वीट किया, ''पराली जलाने से अधिक वायु प्रदूषण का खलनायक ठहराने वाले किसानों से मांफी मांगे। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका कि किसानों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं क्योंकि 10% प्रदूषण ही पराली से होता है, वह भी डेढ़-दो माह के लिए।''
टिकैत की भाकियू किसानों के संघ संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का भाग है। एसकेएम तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहा है और इन कानूनों को रद्द करने और फसल की वैध गारंटी या न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग कर रहा है।
उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों, खासकर दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता काफी हद तक गिर गई है और इससे लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। प्रदूषण के लिए औद्योगिक और वाहनों के उत्सर्जन और आतिशबाजी के साथ-साथ किसानों द्वारा पराली जलाने को भी इसका प्रमुख कारण माना गया है।